बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए का दो-तिहाई बहुमत का दावा
बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण से ठीक पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने यह भरोसा जताया है कि एनडीए गठबंधन दो-तिहाई सीटें जीतकर सरकार बनाएगा। उन्होंने कहा कि इस बार के चुनाव में एनडीए के सभी घटक दल अच्छा प्रदर्शन करेंगे और 160 से अधिक सीटें हासिल करने का लक्ष्य रखा है।
क्या एनडीए का लक्ष्य प्राप्त करना संभव है?
बिहार की कुल 243 विधानसभा सीटों में से पहले चरण में 121 सीटों पर मतदान 6 नवंबर को होगा, जबकि दूसरे चरण में 122 सीटों पर 11 नवंबर को वोटिंग होगी। अमित शाह का मानना है कि यदि एनडीए पहले ही फेज में 80 से अधिक सीटें जीतने में सफल हो जाता है, तो वह अपने लक्ष्य को पूरा कर सकता है। पिछली बार के चुनाव में महागठबंधन ने 61 सीटें जीती थीं, जबकि एनडीए को 59 सीटें मिली थीं।
पहले चरण का प्रदर्शन और सीटें जीतने का अनुमान
पिछले चुनाव में आरजेडी ने 42 सीटें जीती थीं, बीजेपी ने 32, जेडीयू ने 23, कांग्रेस ने 8, माले ने 7, वीआईपी ने 4, सीपीआई और सीपीएम ने दो-दो सीटें हासिल की थीं। इस बार एनडीए को अपने टारगेट को पूरा करने के लिए कम से कम 80 सीटें जीतनी होंगी, जो पिछली तुलना में 20 सीटें अधिक हैं। जेडीयू, बीजेपी, और अन्य घटक दलों को मिलकर इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए बेहतर प्रदर्शन करना होगा।
एनडीए के घटक दलों की भूमिका और चुनावी रणनीति
एनडीए के प्रमुख दल जेडीयू, बीजेपी, और चिराग पासवान की एलजेपी (रामविलास) इस बार अपनी-अपनी सीटों पर मजबूत मुकाबला कर रहे हैं। जेडीयू को 57 सीटों में से 36 पर आरजेडी और कांग्रेस से मुकाबला है, जबकि बीजेपी को 48 सीटों में से 23 पर आरजेडी और 13 पर कांग्रेस से टक्कर है। उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएम और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) के प्रत्याशी भी चुनावी मैदान में हैं।
मौजूदा समीकरण और चुनावी संभावनाएं
पिछले चुनाव की तुलना में इस बार मुकाबला अधिक कड़ा है, खासकर चिराग पासवान और उपेंद्र कुशवाहा के एनडीए में शामिल होने से। इन दोनों नेताओं का प्रभाव दक्षिण और मध्य बिहार में खासा है, जो एनडीए के लिए ‘एक्स फैक्टर’ साबित हो सकता है। साथ ही, जनसुराज, एआईएमआईएम और बसपा जैसी पार्टियों की भागीदारी से चुनावी जंग और भी दिलचस्प हो गई है। यदि एनडीए पहले चरण में 80 से अधिक सीटें जीतने में सफल रहता है, तो अमित शाह का दावा सही साबित हो सकता है।
सत्ता विरोधी लहर और चुनावी रणनीति
20 साल से सत्ता में रहने के कारण नीतीश कुमार के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर की संभावना भी बन रही है। इस बार पहले चरण में 121 सीटों पर चुनाव हो रहा है, जिसमें एनडीए को 80 से अधिक सीटें जीतने का लक्ष्य है। इसके लिए जेडीयू, बीजेपी, चिराग पासवान और कुशवाहा जैसे नेताओं को अपने प्रदर्शन को बेहतर बनाना होगा।
प्रभावशाली नेताओं और चुनावी मुकाबले का विश्लेषण
बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में नीतीश सरकार के दोनों डिप्टी सीएम और बीजेपी के प्रमुख नेताओं का भाग्य दांव पर है। इनमें से कई मंत्री जैसे मंगल पांडे, विजय कुमार सिन्हा, जीवेश मिश्र, संजय सरावगी, केदार प्रसाद गुप्ता, रजू कुमार, कृष्ण कुमार मंटू, सुनील कुमार और सुरेंद्र मेहता अपने-अपने क्षेत्रों में चुनाव लड़ रहे हैं। इन नेताओं का प्रदर्शन इस बार चुनावी परिणामों को प्रभावित कर सकता है।










