गुना में स्वास्थ्य सेवा की गंभीर लापरवाही का मामला
मध्य प्रदेश के गुना जिले में स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता ने एक व्यक्ति की जान ले ली है। एक मरीज को गंभीर स्थिति में जिला अस्पताल पहुंचाने के दौरान सरकारी एंबुलेंस की नाकामी ने पूरे मामले को और भी जटिल बना दिया। मरीज को ब्लड प्रेशर और सीने में दर्द की शिकायत के बाद म्याना स्वास्थ्य केंद्र से जिला अस्पताल भेजा गया था, लेकिन रास्ते में ही एंबुलेंस का टायर पंचर हो गया।
एंबुलेंस की खामियों ने बढ़ाई आपदा
यहां तक कि जब टायर बदलने का प्रयास किया गया, तो वाहन में स्टेपनी जैसी आवश्यक व्यवस्था मौजूद नहीं थी। लगभग एक घंटे तक सड़क किनारे खड़ी रहने के बाद भी कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हो सकी। इस बीच मरीज की हालत बिगड़ती गई और अंततः उसकी मौत हो गई। ड्राइवर ने बताया कि उसे पहली बार इस एंबुलेंस पर भेजा गया था और उसे पता नहीं था कि इसमें स्टेपनी है या नहीं।
मृतक के परिजनों और राजनीतिक प्रतिक्रिया
मृतक के बेटे ने बताया कि पिता को सीने में दर्द हो रहा था, इसलिए तुरंत एंबुलेंस बुलाई गई थी। लेकिन 45 मिनट बाद ही वह म्याना पहुंची और फिर 10 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद ही टायर पंचर हो गया। जब अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया, तो यह स्वास्थ्य विभाग की गंभीर लापरवाही का उदाहरण बन गया। इस घटना के बाद कांग्रेस के विधायक ऋषि अग्रवाल ने कलेक्टर से शिकायत की और भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की।
सरकार और अस्पताल प्रशासन की स्थिति
जिला अस्पताल में हुई इस घटना के बाद से प्रशासन बैकफुट पर है। तहसीलदार ने जांच समिति गठित कर रिपोर्ट मांगी है। इससे पहले भी इसी तरह की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जब ऑक्सीजन की कमी या समय पर एंबुलेंस न पहुंचने के कारण बच्चों और गर्भवती महिलाओं की जान गई है। गुना में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही लगातार हादसों को जन्म दे रही है, जबकि अस्पताल प्रबंधन अपनी बदहाली का रोना रो रहा है।











