पवई में स्टूडियो में बंधक बनाने का मामला
मुंबई के पवई क्षेत्र में गुरुवार दोपहर एक व्यक्ति ने आरए स्टूडियो में 17 बच्चों, दो महिलाओं और एक बुजुर्ग को बंधक बना लिया। इस घटना के दौरान पुलिस ने घंटों प्रयास किया, लेकिन अंत में मुठभेड़ में आरोपी को गोली लगी और उसकी मौत हो गई। यह घटना शहर में सनसनी फैलाने वाली बन गई है।
आरोपी की धमकी और महिला का अनुभव
एक्ट्रेस रुचिता ने बताया कि 4 अक्टूबर को उन्हें रोहित आर्य का एक मैसेज मिला था, जिसमें उसने खुद को फिल्म निर्माता बताया। उसने कहा कि वह होस्टेज सिचुएशन पर आधारित फिल्म बना रहा है। रुचिता ने बातचीत जारी रखी, और 23 अक्टूबर को उसने पूछा कि वह 27, 28 या 29 अक्टूबर को मिल सकती है। उन्होंने 28 अक्टूबर को मुलाकात तय की थी।
मुलाकात की योजना और अचानक बदलाव
रुचिता ने बताया कि 27 अक्टूबर को रोहित ने उन्हें पवई के एक स्टूडियो की लोकेशन भेजी और अगले दिन आने को कहा। लेकिन पारिवारिक कारणों से वह मीटिंग रद्द कर दी। कुछ ही दिनों बाद, जब उसने टीवी पर खबर देखी कि वही रोहित आर्य बच्चों को बंधक बनाकर मारा गया है, तो वह स्तब्ध रह गई।
सावधानी बरतने का संदेश और घटना का प्रभाव
रुचिता ने अपनी पोस्ट में लिखा कि जब उसने घटना का नाम देखा, तो उसका दिल दहल गया। उसने कहा कि यदि वह उस दिन गई होती, तो क्या होता। भगवान और परिवार का शुक्र है कि उन्होंने उसे बाहर जाने से रोक दिया। उसने यह भी कहा कि यह घटना उसे सिखाएगी कि किसी नए व्यक्ति से मिलने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए और अपने परिवार या दोस्तों को इसकी जानकारी देनी चाहिए।
पवई होस्टेज कांड का संक्षिप्त विवरण
गुरुवार को मुंबई के पवई इलाके में आरोपी ने एक बिल्डिंग में स्थित स्टूडियो में 17 बच्चों, दो महिलाओं और एक बुजुर्ग को बंधक बना लिया। पुलिस की क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) ने घंटों की कार्रवाई के बाद सभी को सुरक्षित बाहर निकाला, जबकि आरोपी मुठभेड़ में मारा गया।
आरोपी का गुस्सा और उसके पीछे का कारण
मौजूदा रिपोर्ट्स के अनुसार, आरोपी ने महाराष्ट्र सरकार पर अपने कॉन्सेप्ट और फिल्म की चोरी का आरोप लगाया। उसने कहा कि उसकी फिल्म ‘माझी शाला, सुंदर शाला’ और ‘Let’s Change’ उसकी सोच पर आधारित थी, लेकिन सरकार ने न तो उसे क्रेडिट दिया और न ही 2 करोड़ रुपये की बकाया राशि दी।
आरोपी का आरोप और प्रदर्शन
रोहित का आरोप था कि सरकार ने उसके आइडिया, स्क्रिप्ट और अधिकारों का दुरुपयोग किया। उसने कई बार शिक्षा विभाग और तत्कालीन मंत्री दीपक केसरकर के खिलाफ प्रदर्शन किए, यहां तक कि अनशन भी किया। उसने चेतावनी दी कि यदि उसे न्याय नहीं मिला, तो उसकी मौत जिम्मेदार होगी।











