बच्चों को बंधक बनाने का मामला: पूरी घटना का विवरण
मुम्बई में एक खौफनाक घटना में फिल्म निर्माता से बागी बने रोहित आर्य ने 17 बच्चों को बंधक बनाकर उनके जीवन को खतरे में डाल दिया। यह घटना उस समय हुई जब बच्चे ऑडिशन के लिए एक हॉल में मौजूद थे। करीब 12:30 बजे से बच्चे ऑडिशन के लिए हॉल में पहुंच चुके थे, लेकिन एक घंटे बाद ही रोहित ने दरवाजे को अंदर से बंद कर दिया और बच्चों को बंधक बना लिया।
बच्चों ने 1:15 बजे से ही शीशे से मदद के लिए चिल्लाना शुरू किया, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने बातचीत का प्रयास किया, लेकिन रोहित ने अपनी बात नहीं मानी। लगभग दो घंटे तक पुलिस और रोहित के बीच बातचीत चलती रही, जिसमें उसने धमकी दी कि यदि उसकी बात नहीं मानी गई तो वह इन बच्चों को जिंदा जला देगा।
संकट के दौरान पुलिस और फायर ब्रिगेड का अभियान
करीब 3:30 बजे पुलिस ने फायर ब्रिगेड को बुलाया। 3:45 बजे फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और सुरक्षा उपकरणों के साथ मोर्चा संभाला। 3:50 बजे उन्होंने बाथरूम की खिड़की तोड़ दी, जिससे पुलिस अंदर प्रवेश कर सकी। मुंबई पुलिस की क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) के तीन अधिकारी खिड़की से अंदर घुसे। जैसे ही पुलिस अंदर दाखिल हुई, रोहित ने एयरगन से फायर किया। पुलिस को लगा कि उसने असली बंदूक से गोली चलाई है। जवाबी कार्रवाई में एक इंस्पेक्टर ने गोली चलाई, जो रोहित के सीने में लगी।
अंतिम संघर्ष और बच्चों की सुरक्षित रिहाई
4:00 बजे गोली लगने के बाद रोहित जमीन पर गिर पड़ा। तुरंत ही उसे अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद, 4:30 बजे सभी 17 बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इस घटना का अंत हिंसक संघर्ष के साथ हुआ, जिसमें पुलिस ने त्वरित कार्रवाई कर बच्चों की जान बचाई।
रोहित आर्य का गुस्सा और विवाद का इतिहास
पिछले वर्षों से रोहित आर्य का गुस्सा महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ था। उसने आरोप लगाया कि उसकी फिल्म और विचारधारा को सरकार ने चुराया है। उसका दावा था कि उसकी परियोजना ‘माझी शाला, सुंदर शाला’ उसकी सोच और फिल्म ‘Let’s Change’ पर आधारित थी, लेकिन सरकार ने न तो उसे क्रेडिट दिया और न ही 2 करोड़ रुपये की बकाया राशि का भुगतान किया।
रोहित ने इस मुद्दे को लेकर कई बार प्रदर्शन किए और अनशन भी किया। उसने आरोप लगाया कि सरकार ने उसके आइडिया, स्क्रिप्ट और अधिकारों का दुरुपयोग किया। इसके कारण वह मानसिक तनाव में आ गया था और पिछले कुछ महीनों से डिप्रेशन का शिकार था। पुलिस ने उसके पास से एयरगन और केमिकल पदार्थ भी बरामद किए।
आरोप और जांच का वर्तमान चरण
पुलिस ने इस घटना की जांच के आदेश दिए हैं। वे यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि रोहित ने बच्चों को ऑडिशन के नाम पर कैसे बुलाया और हथियार कैसे स्टूडियो में लाया। फायर ब्रिगेड का कहना है कि उन्होंने केवल पुलिस को अंदर जाने में मदद की, बाकी कार्रवाई पूरी तरह से मुंबई पुलिस का काम था।
रोहित का वीडियो संदेश और उसकी मनोस्थिति
घटना के बीच ही रोहित का एक वीडियो सामने आया, जिसमें उसने खुद को इस घटना का मुख्य आरोपी बताया। वीडियो में उसने कहा कि उसने यह सब एक योजना के तहत किया है और उसकी कोई बड़ी वित्तीय मांग नहीं है। उसका दावा था कि उसकी मांगें नैतिकता से जुड़ी हैं और वह आतंकवादी नहीं बल्कि सवाल पूछने वाला व्यक्ति है।
आर्थिक विवाद और मानसिक तनाव का कारण
रोहित का मूल निवास पुणे था। उसने बताया कि उसे महाराष्ट्र के तत्कालीन शिक्षा मंत्री दीपक केसरकर के कार्यकाल में एक स्कूल प्रोजेक्ट का टेंडर मिला था, लेकिन उसे अभी तक उसका भुगतान नहीं मिला। इस कारण वह आर्थिक संकट और मानसिक तनाव में था।
वह चेम्बूर की अन्नपूर्णा इमारत की 9वीं मंजिल पर रहता था, जो उसके किसी रिश्तेदार का था। वह पिछले चार वर्षों से अमेरिका में रह रहे उनके परिवार से जुड़ा था। घटना से पहले वह सुबह करीब 9 बजे वहां से निकला था। पुलिस ने उसकी जांच के लिए उस स्थान पर भी पहुंची।











