बिहार चुनाव का सियासी महाभारत का रूप लेता जा रहा है
बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच राजनीतिक जंग तेज हो गई है, जहां हर दल अपने वर्चस्व की लड़ाई लड़ रहा है। खासतौर पर लालू प्रसाद यादव के परिवार में चल रही खींचतान ने इस चुनावी मैदान को महाभारत की रणभूमि बना दिया है। आरजेडी प्रमुख लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव खुद को कृष्ण और छोटे भाई तेजस्वी यादव को अर्जुन बताकर अपनी भूमिका तय कर चुके थे।
दोनों भाइयों के बीच सियासी टकराव की शुरुआत
जहां तेजस्वी यादव अपने शांत स्वभाव के लिए जाने जाते हैं, वहीं तेज प्रताप ने आक्रामक रुख अपना लिया है। पहले वे तेजस्वी को मुख्यमंत्री बनाने का सपना देख रहे थे, लेकिन लालू परिवार से बाहर किए जाने के बाद उनकी स्थिति बदल गई। महुआ सीट पर आरजेडी के उम्मीदवार के चयन और प्रचार के दौरान ही दोनों भाइयों के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए।
तेज प्रताप का आरजेडी से अलग मोर्चा
तेज प्रताप यादव ने अपने राजनीतिक सफर को नई दिशा देते हुए अपनी पार्टी ‘जन शक्ति जनता दल’ का गठन किया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि वे अब आरजेडी में वापस नहीं जाएंगे और अपने दम पर चुनाव लड़ रहे हैं। इस बीच, लालू परिवार ने तेज प्रताप को पार्टी से बाहर कर दिया है, और उनके साथ कोई भी नेता नजर नहीं आ रहा है। परिवार की चुप्पी और भाई का साथ छोड़ना उनके अकेलेपन को दर्शाता है।
सियासी जंग में तेजस्वी और तेजप्रताप का आमना-सामना
तेजस्वी यादव ने अपने छोटे भाई के खिलाफ महागठबंधन का प्रत्याशी उतार दिया है, जिससे तेजप्रताप की राह और भी कठिन हो गई है। तेजप्रताप ने स्पष्ट कर दिया है कि वे किसी भी कीमत पर आरजेडी में शामिल नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि जनता का आशीर्वाद ही उनकी जीत का आधार है और वे सत्ता के लालच से दूर हैं।
तेजस्वी के खिलाफ तेजप्रताप का कड़ा रुख
तेज प्रताप ने राघोपुर सीट से अपने प्रतिद्वंद्वी के रूप में आरजेडी के पूर्व महासचिव प्रेम कुमार यादव को उम्मीदवार बनाया है। उन्होंने कहा कि यदि तेजस्वी ने उनके खिलाफ प्रत्याशी उतारा है, तो उन्होंने भी जवाबी कदम उठाया है। तेजप्रताप का मानना है कि वह अपने दम पर चुनाव लड़ेंगे और अपने समर्थकों के साथ प्रचार करेंगे।
दोनों भाइयों के बीच सियासी खींचतान का अंत?
तेज प्रताप ने अपने छोटे भाई को ‘जननायक’ मानने से इनकार कर दिया है और कहा कि तेजस्वी का राजनीतिक आधार उनके पिता लालू यादव की वजह से है। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक तेजस्वी अपने बलबूते पर नहीं आएंगे, तब तक उन्हें नेता नहीं माना जाएगा। इस तरह दोनों भाइयों के बीच सियासी जंग अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है, और कोई सुलह की संभावना नजर नहीं आ रही है।










