अमेरिका और वेनेजुएला के बीच बढ़ते तनाव का कारण
अमेरिका और वेनेजुएला के बीच तनाव की स्थिति लगातार बढ़ती जा रही है, जिससे यह संकेत मिल रहे हैं कि दोनों देशों के बीच युद्ध की आशंका बढ़ गई है। हाल ही में अमेरिका ने अपने करीब दस हजार सैनिकों की तैनाती के साथ ही अत्याधुनिक युद्धपोत, एयरक्राफ्ट कैरियर और परमाणु पनडुब्बियों को भी क्षेत्र में भेजा है। इन कदमों के बाद यह माना जा रहा है कि अमेरिका वेनेजुएला पर आक्रमण करने की योजना बना रहा है।
वहीं, इस सैन्य तैयारी के बावजूद वेनेजुएला अपने रुख में कोई नरमी नहीं दिखा रहा है। बल्कि, वह सीधे तौर पर अमेरिका को चुनौती दे रहा है। इस स्थिति में सवाल उठता है कि छोटे देश होने के बावजूद वेनेजुएला इतनी हिम्मत कैसे कर रहा है। आपको बता दें कि वेनेजुएला की आबादी भारत के हरियाणा राज्य जितनी है, जो इस बात को और भी आश्चर्यजनक बनाता है।
वेनेजुएला की ताकत और उसकी रणनीति
वेनेजुएला के पास क्या ऐसी तकनीक और हथियार हैं, जो अमेरिका जैसे महाशक्ति को खुली चेतावनी देते हुए युद्ध की धमकी दे रहे हैं? दरअसल, वेनेजुएला ने रूस (Russia) से प्राप्त अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल कर अपनी सैन्य ताकत को मजबूत किया है। रूस से आयातित हथियारों ने अमेरिका को चिंता में डाल दिया है, खासकर जब ट्रंप प्रशासन के समय में यह खबर आई कि वेनेजुएला के पास पांच हजार से अधिक ईग्ला एस मानव पोर्टेबल मिसाइलें हैं।
यह मिसाइलें कंधे से दागी जाने वाली हैं और भारत जैसे देशों में भी इस्तेमाल होती हैं। राष्ट्रपति मादुरो ने पिछले दस वर्षों में इन मिसाइलों पर काफी निवेश किया है, जो अमेरिकी विमानों के लिए एक बड़ा खतरा साबित हो सकती हैं। इसके साथ ही, चीन (China) ने भी वेनेजुएला का समर्थन करते हुए अमेरिका की सैन्य तैनाती की कड़ी निंदा की है।
आर्थिक प्रतिबंध और राजनीतिक संघर्ष
अमेरिका ने वेनेजुएला के तेल निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिए हैं, जिससे वहां गृह युद्ध जैसी स्थिति बन गई है। बावजूद इसके, राष्ट्रपति मादुरो अपने पद पर अडिग हैं। अमेरिकी सरकार ने अब लोकतंत्र की बहाली का नारा देते हुए वेनेजुएला में बदलाव लाने का प्रयास शुरू किया है। अमेरिकी डीप स्टेट ने घोषणा की है कि अब समय आ गया है कि वेनेजुएला में भी लोकतंत्र स्थापित हो।
इस मिशन में मुख्य भूमिका निभा रही हैं मरिया कोरीना मचाडो, जिन्हें हाल ही में शांति का नोबेल पुरस्कार भी मिला है। मचाडो का कहना है कि यदि वेनेजुएला में उनकी सरकार बनती है, तो वह अमेरिकी कंपनियों को वहां तेल व्यापार के लिए आमंत्रित करेंगी। यह बयान स्पष्ट संकेत है कि अमेरिका वेनेजुएला में तख्तापलट कर सत्ता परिवर्तन का प्रयास कर रहा है।
अंत में, मचाडो ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ भी अपनी नजदीकियों का जिक्र किया है। उन्होंने एक भारतीय चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा कि वह स्वतंत्र वेनेजुएला में प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत करने के लिए तैयार हैं, जो इस क्षेत्र में नई राजनीतिक हलचल का संकेत है।











