सुप्रीम कोर्ट के अगले मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई ने अपने उत्तराधिकारी के रूप में वरिष्ठतम न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत के नाम की सिफारिश की है। इस सिफारिश के तहत, उन्होंने विधि मंत्रालय को आगामी 53वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में जस्टिस सूर्यकांत का नाम भेजा है।
जस्टिस सूर्यकांत का कार्यकाल 9 फरवरी 2027 तक रहेगा, जो लगभग डेढ़ साल का होगा। उन्हें 24 मई 2019 को सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया था, और यह भी उस दिन था जब CJI गवई का पदोन्नति हुआ था। दोनों न्यायाधीशों को एक ही दिन पदोन्नत किया गया था, लेकिन वरिष्ठता के आधार पर जस्टिस गवई पहले शपथ ग्रहण कर चुके थे। इसी कारण से, CJI गवई ने जस्टिस सूर्यकांत के नाम की सिफारिश अपने उत्तराधिकारी के रूप में की है।
जस्टिस सूर्यकांत का जीवन और करियर
जस्टिस सूर्यकांत का जन्म 10 फरवरी 1962 को हरियाणा के हिसार जिले में एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। उन्होंने अपने दो दशकों से अधिक के न्यायिक अनुभव के साथ देश के सबसे बड़े न्यायिक पद पर कदम रखा है। उनके कार्यकाल में आर्टिकल 370 को हटाने, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, लोकतंत्र, भ्रष्टाचार, पर्यावरण संरक्षण और लैंगिक समानता जैसे महत्वपूर्ण मामलों पर ऐतिहासिक फैसले दिए गए हैं।
2019 में सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में नियुक्ति के बाद, जस्टिस सूर्यकांत ने अपने कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। उनका कार्यकाल 9 फरवरी 2027 को समाप्त होगा, जब वह 65 वर्ष की उम्र में रिटायर होंगे।
प्रक्रिया और नियम
मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों की नियुक्ति, स्थानांतरण और पदोन्नति के लिए नियम तय हैं। इसमें कहा गया है कि भारत के मुख्य न्यायाधीश के पद पर उस जज को नियुक्त किया जाना चाहिए जो सुप्रीम कोर्ट का सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश हो और इस पद के लिए उपयुक्त हो।
केंद्रीय कानून मंत्री सही समय पर मौजूदा CJI से नए मुख्य न्यायाधीश की सिफारिश करेंगे। परंपरा के अनुसार, यह पत्र मौजूदा CJI के 65 वर्ष की उम्र पूरी होने से एक महीने पहले भेजा जाता है।











