भारत की ऊर्जा नीति में विविधता और स्थिरता पर जोर
भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि तेल और गैस की खरीद में उसकी प्राथमिकता अपने उपभोक्ताओं का हित है। विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि देश अपनी ऊर्जा रणनीति में विविधता और स्थिरता को सर्वोपरि मानता है ताकि वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद आपूर्ति और कीमतों में संतुलन बना रहे।
वर्तमान में, भारत कई देशों से तेल की आपूर्ति को विविध कर रहा है और बाजार की स्थिति के अनुसार नए स्रोतों को जोड़ रहा है। जायसवाल ने यह भी बताया कि अमेरिका (US) के साथ ऊर्जा सहयोग मजबूत हुआ है और इस दिशा में चर्चा जारी है, लेकिन निर्णय पूरी तरह से राष्ट्रीय हितों के अनुरूप ही लिए जाएंगे।
रूस से तेल खरीद पर भारत का रुख स्पष्ट
गौरतलब है कि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें रूस से तेल की खरीद में कमी लाने का आश्वासन दिया है। इस पर भारत ने बार-बार यह स्पष्ट किया है कि रूस से सस्ता तेल खरीदना उसकी रणनीतिक और आर्थिक जरूरतों के अनुरूप है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की यह ऊर्जा नीति उपभोक्ता केंद्रित और दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित करने वाली है। देश अब अमेरिका, मध्य पूर्व, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका जैसे विभिन्न स्रोतों से तेल की आपूर्ति बढ़ा रहा है, ताकि किसी एक स्रोत पर निर्भरता कम हो सके।
दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा का लक्ष्य
इस तरह भारत की ऊर्जा नीति न केवल स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित कर रही है, बल्कि कीमतों में संतुलन और दीर्घकालिक सुरक्षा भी प्रदान कर रही है। यह रणनीति देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाने और वैश्विक बाजार में अपनी स्थिति को स्थिर रखने के लिए अहम है।











