भोपाल के पूर्वी बाईपास पर सड़क धंसने का मामला
भोपाल के पूर्वी बाईपास पर सड़क के अचानक धंसने की घटना ने निर्माण की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (MPRDC) ने इस घटना की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट जारी की है, जिसमें उन्होंने आश्चर्यजनक तर्क प्रस्तुत किया है कि यह दुर्घटना किसानों द्वारा मिट्टी खोदने के कारण हुई। हालांकि, इस रिपोर्ट में यह भी स्वीकार किया गया है कि सड़क का निर्माण मानकों के अनुरूप नहीं था और मिट्टी की गुणवत्ता भी संतोषजनक नहीं थी।
घटना का संक्षिप्त विवरण और तत्काल कार्रवाई
सोमवार को भोपाल के सूखी सेवनिया रेलवे ओवरब्रिज (ROB) के पास बाईपास का लगभग 75 मीटर लंबा हिस्सा अचानक धंस गया। इस घटना में सड़क के नीचे बनी आर.ई. वॉल (Retaining Wall) क्षतिग्रस्त हो गई, जिससे पूरी सड़क धंस गई। सौभाग्यवश उस समय वहां कोई वाहन नहीं था, जिससे किसी भी तरह की जनहानि नहीं हुई। घटना के तुरंत बाद, MPRDC और पुलिस ने मौके पर पहुंचकर पूरे क्षेत्र को बैरिकेड कर दिया और यातायात को दूसरी लेन से डायवर्ट कर दिया, ताकि यातायात सुचारू रूप से चलता रहे।
निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल और जांच का आदेश
मामले की गंभीरता को देखते हुए, MPRDC ने मंगलवार शाम को एक बयान जारी कर बताया कि प्रारंभिक निरीक्षण में पाया गया है कि निवेशक कंपनी ने आर.ई. वॉल का निर्माण मानकों के अनुसार नहीं किया। मिट्टी की गुणवत्ता कमजोर थी और इम्बैंकमेंट में स्टोन पिचिंग का कार्य भी नहीं किया गया था। बारिश के दौरान पानी के रिसाव से मिट्टी और कमजोर हो गई, साथ ही किसानों द्वारा दीवार के पास मिट्टी खोदने से जल निकासी बाधित हो गई। इससे पानी भरने और दबाव बढ़ने से सड़क का हिस्सा धंस गया।
जांच और मरम्मत कार्य की योजना
घटना के बाद, निगम ने तीन वरिष्ठ तकनीकी अधिकारियों की जांच समिति का गठन किया है, जो सात दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। साथ ही, धंसे हुए हिस्से की मरम्मत का कार्य तुरंत शुरू कर दिया गया है, जिसे दस दिनों में पूरा करने का लक्ष्य है। इसके अलावा, निर्माण में प्रयुक्त मिट्टी के नमूने लेकर उन्हें PWD (Public Works Department) की केंद्रीय प्रयोगशाला में परीक्षण के लिए भेजा गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद, यदि निर्माण में लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित विभागीय अधिकारियों, निवेशक और कंसल्टेंट की जवाबदेही तय की जाएगी।
यह उल्लेखनीय है कि भोपाल ईस्टर्न बाईपास का निर्माण बी.ओ.टी. (टोल) योजना के तहत किया गया था, जिसमें हैदराबाद की ट्रांसट्रॉय प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को कार्य सौंपा गया था। यह परियोजना 2010 में शुरू हुई और 2012-13 में पूरी हुई थी, लेकिन 2020 में कंपनी द्वारा अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन करने पर उसे निरस्त कर दिया गया और तीन साल के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया गया।










