जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य बनाने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट में जम्मू-कश्मीर को फिर से पूर्ण राज्य का दर्जा देने की याचिका पर महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। अदालत ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर चार हफ्ते में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से कहा कि उन्हें जवाब तैयार करने के लिए अतिरिक्त समय चाहिए और उन्होंने सुनवाई को स्थगित करने का अनुरोध किया।
आतंकी घटना का जिक्र और राजनीतिक बहस
सुप्रीम कोर्ट ने पहलगाम में हुई आतंकी घटना का उल्लेख किया, जिसमें न्यायाधीशों ने कहा कि जमीनी हकीकत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह घटना आतंकवादियों के हमले का संदर्भ है। इस बीच, याचिकाकर्ता के वकील गोपाल शंकर नारायण ने कहा कि यह घटना उनके राज्य सरकार के कार्यकाल में हुई थी। इस पर सॉलिसिटर जनरल ने आपत्ति जताई और कहा कि यह शब्द गलत है। उन्होंने तर्क दिया कि जम्मू-कश्मीर की अधिकतर जनता भारत सरकार को अपनी सरकार मानती है।
याचिका और सरकार का वादा
जम्मू-कश्मीर के कॉलेज शिक्षक जहूर अहमद भट्ट और कार्यकर्ता खुर्शीद अहमद मलिक ने मिलकर यह याचिका दायर की है, जिसमें केंद्र से आग्रह किया गया है कि जम्मू-कश्मीर को जल्द ही फिर से पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि सॉलिसिटर जनरल ने पहले सुप्रीम कोर्ट को आश्वासन दिया था कि यह कदम उठाया जाएगा, लेकिन आर्टिकल 370 पर फैसले के बाद से अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
अगली सुनवाई और सरकार का रुख
अब केंद्र सरकार को चार हफ्ते में अपना जवाब देना है, जिसके बाद ही इस मामले में अगली सुनवाई होगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर क्या निर्णय लेती है। इस मामले की प्रगति पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं, क्योंकि जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा पुनः बहाल करने का सवाल देश की राजनीतिक और सुरक्षा स्थिति के लिए अहम है।











