बिहार विधानसभा चुनाव की तिथियों का ऐलान और राजनीतिक हलचल
बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव के मतदान और परिणाम की तारीखें अब स्पष्ट हो चुकी हैं। जैसे ही चुनावी प्रक्रिया नजदीक आ रही है, राजनीतिक दलों ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा शुरू कर दी है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) भी सीट साझा करने के फॉर्मूले को अंतिम रूप देने में जुटा है, लेकिन यह प्रक्रिया आसान नहीं दिख रही है। कई दल अपनी सीटों की संख्या बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, जिससे गठबंधन में तनाव की स्थिति बन रही है।
एनडीए में सीट बंटवारे को लेकर असमंजस और पार्टियों की प्रतिक्रिया
आज (शनिवार) को हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) की संसदीय बोर्ड की बैठक होने वाली है। इससे पहले, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने खास बातचीत में कहा कि अंतिम निर्णय अभी नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि दिल्ली में भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई है और वहां भी बातचीत जारी है। मांझी ने यह भी कहा कि वे एनडीए के सदस्य हैं और उनके साथी भी दिल्ली में बैठक कर रहे हैं।
मांझी का सीट शेयरिंग पर बयान और गठबंधन की स्थिति
जेपी नड्डा के सीट शेयरिंग के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए मांझी ने कहा कि नड्डा अध्यक्ष हैं और जो भी निर्णय लिया जाएगा, उसे मानना पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अभी इस पर पूरी जानकारी नहीं है, लेकिन जो सीटें मिलेंगी, उन पर वे चुनाव लड़ेंगे। मांझी ने यह भी स्पष्ट किया कि वे अनुशासित पार्टी के सदस्य हैं और गठबंधन में रहकर अपने दायित्व का निर्वहन करेंगे।
2020 के चुनाव में हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा का प्रदर्शन और क्षेत्रीय प्रभाव
2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) ने सात सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिनमें से चार पर जीत हासिल की। पार्टी का प्रभाव मगध क्षेत्र और उसके आसपास के इलाकों में मजबूत है। इस चुनावी सफलता के बाद, पार्टी की स्थिति बिहार की राजनीति में मजबूत मानी जा रही है।











