रूस-ईरान संबंधों का मजबूत होना और क्षेत्रीय शांति प्रयास
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि मॉस्को ईरान को अमेरिका और इज़राइल के साथ चल रहे क्षेत्रीय विवाद को सुलझाने में मदद करने के लिए पूरी कोशिश करेगा। उन्होंने तुर्कमेनिस्तान में ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच संबंधों तथा क्षेत्रीय घटनाक्रम पर विचार-विमर्श किया। रूसी विदेश मंत्रालय के अनुसार, बैठक की शुरुआत में पुतिन ने कहा कि आज का सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा क्षेत्र की वर्तमान स्थिति है। उन्होंने बताया कि ईरान इस विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से खत्म करने के लिए प्रयासरत है, और उसने इस दिशा में नए प्रस्ताव भी प्रस्तुत किए हैं।
क्षेत्रीय स्थिरता और द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा
पुतिन ने कहा कि मिस्टर प्रेसिडेंट, आप हमारी स्थिति से अच्छी तरह परिचित हैं। हम इस जटिल स्थिति को सुलझाने में आपकी मदद करने के लिए हर संभव प्रयास करने को तैयार हैं। इस बैठक का उद्देश्य क्षेत्र की स्थिति, रूस और ईरान के बीच द्विपक्षीय संबंधों के विकास और इन प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा करना था। उन्होंने बताया कि हाल ही में बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शिखर सम्मेलन में दोनों नेताओं ने मुलाकात की थी। अब हमारे पास अपने संबंधों को मजबूत करने, क्षेत्रीय हालात पर विचार करने और आगे की रणनीतियों पर चर्चा करने का अवसर है।
आर्थिक और मानवीय सहयोग में प्रगति
पुतिन ने कहा कि दोनों देशों के बीच पिछले साल की शुरुआत में हस्ताक्षरित बुनियादी संधि के आधार पर द्विपक्षीय संबंध सकारात्मक दिशा में बढ़ रहे हैं। आर्थिक सहयोग के संदर्भ में, उन्होंने बताया कि 2025 तक व्यापार में 21 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज हुई है, और 2026 के पहले सात महीनों में भी यह रुझान जारी रहा। इसके अलावा, दोनों देशों ने मानवीय सहयोग को भी मजबूत किया है, जिससे एक अच्छी मिसाल कायम हुई है। रूस और ईरान ने कई कार्यक्रम आयोजित किए हैं, जो दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत बनाते हैं। पुतिन ने अंत में ईरान के सर्वोच्च नेता को शुभकामनाएँ भी भेजीं।
इस बीच, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत के दौरान बार-बार हमलों के बावजूद ईरान बातचीत जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि हम बातचीत कर रहे हैं, लेकिन हर बार जब हम अमेरिका के साथ संवाद करते हैं, तो वे फिर से हमला कर देते हैं। फिर भी, ईरान बातचीत की मेज छोड़ने का कोई इरादा नहीं रखता।











