करवा चौथ का त्योहार और इसकी परंपराएं
करवा चौथ का त्योहार भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व रखता है, जिसमें महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और खुशहाली के लिए व्रत रखती हैं। इस दिन सुबह से ही निर्जला व्रत शुरू हो जाता है, और चंद्रमा के दर्शन के बाद ही व्रत का पारण किया जाता है। यह पर्व प्रेम और विश्वास का प्रतीक माना जाता है, जो दांपत्य जीवन को मजबूत बनाने में सहायक होता है।
सही समय और पूजा विधि
करवा चौथ का व्रत सुबह 6:19 बजे से रात 8:13 बजे तक रहता है, जिसमें महिलाएं चंद्रमा के दर्शन का इंतजार करती हैं। चंद्रमा को अर्घ्य देते समय चंद्र मंत्र और स्तुति का जाप करना आवश्यक है। इस दौरान, पति की लंबी उम्र और स्वास्थ्य के लिए माता करवा और चंद्रदेव से प्रार्थना की जाती है। पूजा का शुभ समय शाम 5:57 बजे से रात 7:11 बजे के बीच होता है, जिसमें करवा माता, भगवान गणेश और चंद्रदेव की पूजा की जाती है।
चंद्रमा दर्शन और शुभकामनाएं
चंद्रमा का उदय रात 8:13 बजे (IST) दिल्ली-एनसीआर में होता है, जबकि अन्य प्रमुख शहरों में यह समय 8:10 से 9:20 बजे के बीच रहता है। जैसे ही चंद्रमा दिखाई देता है, महिलाएं छन्नी में दीया रखकर उसका दर्शन करती हैं। इस परंपरा का उद्देश्य पति-पत्नी के बीच प्रेम, विश्वास और वैवाहिक खुशहाली को बढ़ावा देना है। साथ ही, व्रत खोलने के समय चंद्रमा को देखकर शुभकामनाएं दी जाती हैं, जो दांपत्य जीवन में सुख और समृद्धि लाने का प्रतीक है।











