दिल्ली में DTC ड्राइवरों की हड़ताल में कमी, आवश्यक सेवाएं बहाल
16 सितंबर से शुरू हुई दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (DTC) ड्राइवरों की हड़ताल अब धीरे-धीरे कम हो रही है, क्योंकि दिल्ली सरकार ने आवश्यक परिवहन सेवाओं को छह महीने के लिए अनिवार्य घोषित कर दिया है। इस कदम के तहत, DTC और क्लस्टर बस सेवाओं पर हड़ताल और आंदोलन पर रोक लगा दी गई है, जिससे यात्री राहत की सांस ले रहे हैं। इससे बस सेवाओं में सुधार देखने को मिला है और यात्रियों को अब अधिक सुविधा मिल रही है। वर्तमान में हड़ताली ड्राइवरों को प्रतिदिन लगभग 747 रुपये वेतन मिल रहा है, जबकि यूनियन की मांग है कि उन्हें 2000 रुपये प्रतिदिन, साथ ही मेडिकल सुविधाएं और सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जाए।
ESMA के आदेश का प्रभाव और निजी बस सेवाओं पर असर
ड्राइवरों की कमी के कारण निजी कंसेशनायर (concessionaire) की बस सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं। यूनियन के अनुसार, DTC ने करीब 500 ड्राइवरों को निजी ऑपरेटरों के साथ बस संचालन के लिए तैनात किया है, जिनमें से कुछ को पहले गैर-ड्राइविंग ड्यूटी दी गई थी। ESMA (Emergency Management and Safety Act) का आदेश नियमित कर्मचारियों के साथ-साथ संविदा, आउटसोर्स और निजी कंसेशनायर के कर्मचारियों पर भी लागू होगा। दिल्ली में लगभग 6600 बसें हैं, जिनमें से करीब 4900 इलेक्ट्रिक और 1750 CNG बसें शामिल हैं, जो शहर के सार्वजनिक परिवहन का मुख्य आधार हैं।
ड्राइवरों की मुख्य मांगे और हड़ताल का कारण
ड्राइवर और कंडक्टर वेतन में वृद्धि, मेडिकल सुविधाएं और दुर्घटना बीमा जैसी मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं। उनका कहना है कि उन्हें महीने में करीब 22 हजार रुपये वेतन मिलता है, जबकि स्थायी कर्मचारियों को 80 हजार रुपये तक मिलते हैं। ड्राइवरों की मुख्य मांग है कि उनका वेतन प्रतिदिन 1500 रुपये किया जाए और उन्हें बेहतर मेडिकल सुविधाएं तथा जीवन बीमा भी प्रदान किया जाए। उनका तर्क है कि जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं होंगी, तब तक वे हड़ताल जारी रखेंगे।










