बेला एस्टेट में वोटर लिस्ट से नाम हटाने का विवाद तेज
बेला एस्टेट में वोटर लिस्ट से 728 नामों को हटाने को लेकर विवाद गहरा हो गया है। कांग्रेस ने इसे वोट चोरी का मामला बताया है, जबकि बीएलओ (ब्लॉक लेवल ऑफिसर) का तर्क है कि सत्यापन के दौरान कई पतों को खाली पाया गया और इस प्रक्रिया का वीडियो रिकॉर्डिंग भी अधिकारियों को सौंपी गई है।
सत्यापन प्रक्रिया और आरोप-प्रत्यारोप
बीएलओ ने उस क्षेत्र को एक सुनसान इलाका बताया है। उनका दावा है कि जब वे वहां पहुंचे तो वहां केवल कुछ कच्चे घर ही थे। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने सत्यापन के दौरान रिपोर्ट अपने वरिष्ठ अधिकारियों को सौंप दी है। साथ ही, उनके पास उन पतों की वीडियो रिकॉर्डिंग भी है, जिसे उन्होंने अधिकारियों के साथ साझा किया है।
एक ही पते पर सैकड़ों वोटर?
आजतक को प्राप्त एसआईआर (SIR) फॉर्म्स इस विवाद में एक नया पहलू जोड़ते हैं। इन फॉर्म्स में से अधिकांश में एक ही पता लिखा है – “एग्रीकल्चर JJ बेला एस्टेट” या “एग्रीकल्चर लैंड”। कई फॉर्म्स में घर का विशिष्ट नंबर या पहचानने योग्य पता स्पष्ट नहीं था। करीब 20 फॉर्म्स में पता “एग्रीकल्चर JJ बेला एस्टेट” या “एग्रीकल्चर लैंड” लिखा था, लेकिन कोई खास पहचान या निशान नहीं था।
इसके अलावा, बीएलओ का दावा है कि कई एसआईआर फॉर्म एक जैसी लिखावट में भरे गए थे और उन पर भी एक ही पता दर्ज था।
स्थानीय लोगों की शिकायतें और हकीकत
बेला एस्टेट साइट का दौरा करने पर पता चला कि वहां रहने वाले परिवार अस्थायी ढांचों में रह रहे थे। उनके पास बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं भी नहीं थीं।
स्थानीय महिला मंजू ने कहा कि उनका परिवार बेला एस्टेट में रहता था और उनके पास वोटर आईडी कार्ड भी था। उन्होंने बताया, “मेरा जन्म यहीं 1998 में हुआ था। मेरे पास वोटर आईडी, पैन कार्ड और बैंक का विवरण है। फिर भी, मेरा नाम लिस्ट से हटा दिया गया है। यह हमें नागरिक मानने से इनकार करने जैसा है।”
एक अन्य निवासी कमल ने भी ऐसी ही शिकायत की। उन्होंने 1961 से चली आ रही वोटर लिस्ट दिखाते हुए कहा कि उनके पिता और दादा के नाम बाद की लिस्ट में स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं थे।
इन सभी दावों के बीच सवाल उठ रहा है कि इन 728 वोटरों का वेरिफिकेशन कैसे किया गया और उनके नाम क्यों हटाए गए हैं।











