दिल्ली-एनसीआर में अनौपचारिक कडलिंग सेवाओं का बढ़ता चलन
दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में विशाल आबादी के बीच, सामाजिक दूरी और अकेलेपन की भावना तेजी से बढ़ रही है। यहां के मकान और गलियां इतनी सटी हुई हैं कि एक घर में छींक होने पर दूसरे घर तक हलचल मच जाती है। चेहरे और आवाजें हर जगह हैं, लेकिन इन सबके बीच एक खामोशी और पर्दा है, जो किसी को भी अंदर की बात जानने से रोकता है। सड़कें भले ही खूबसूरत मुलाकातों से भरी हों, लेकिन अक्सर हिंसक घटनाओं का भी गवाह बनती हैं।
कडल थैरेपी और उसकी बढ़ती लोकप्रियता
इन अकेलेपन को दूर करने के लिए कई तरह की सेवाएं बाजार में आ चुकी हैं, जिनमें से एक है कडल थैरेपी। इस सेवा में कुछ घंटों से लेकर पूरे दिन तक साथ रहने और गले लगाने का विकल्प मौजूद है, जिसके लिए अलग-अलग शुल्क लिया जाता है। Aajtak.in ने अंडरकवर रिपोर्टिंग के दौरान नकली नाम और पेशे के साथ इन कडल थैरेपिस्ट्स से बातचीत की।
बुकिंग और सेवाओं का विस्तार
मुझे इस वीकेंड किसी कडल थैरेपी विशेषज्ञ से मिलना था, लेकिन पहले मुझे उनसे बात करनी थी। उन्होंने बताया कि इस हफ्ते बुकिंग पहले से ही पूरी हो चुकी है, और खास बात यह है कि मुझे महिला प्रोफेशनल की जरूरत है। विशेषज्ञ ने सुझाव दिया कि क्रॉस-जेंडर थैरेपी अधिक प्रभावी हो सकती है, इसलिए आप अगले सप्ताहांत के लिए बुकिंग कर सकते हैं। बातचीत के दौरान, एक अनुभवी कडल थैरेपिस्ट ने कहा कि यदि आप आजमाएंगी तो खुद ही समझ जाएंगी कि मैं ऐसा क्यों कह रहा हूं।
कडलिंग का प्रोफेशनल और कानूनी पहलू
रॉनी नाम का एक विशेषज्ञ फोन पर था, जिसने बताया कि वह अमेरिका के टेनेसी से आठ साल पहले कडलिंग की ट्रेनिंग लेकर भारत आया है। वह तीन घंटे की सेशन के लिए 4999 रुपये चार्ज करता है, जो बाजार में सबसे रियायती माना जाता है। रॉनी का दावा है कि वह अपने सेशनों में घर, ऑफिस, या फैंटेसी जैसी बातें भी सुनता है, बिना जजमेंट के।
सेशन का स्वरूप और सुरक्षा प्रोटोकॉल
सेशनों में मुख्य रूप से बातचीत, आंखों में आंखें डालकर बैठना, हाथ पकड़ना और हग जैसी गतिविधियां शामिल हैं। यदि ग्राहक चाहें, तो वे नेक्स्ट बुकिंग भी कर सकते हैं। विशेषज्ञ का कहना है कि यह प्रोफेशन भरोसे और गोपनीयता पर आधारित है, और ग्राहक का नाम या पहचान छुपाई जाती है।
सुरक्षा और कानूनी जटिलताएं
कडलिंग का कोई सरकारी मान्यता प्राप्त लाइसेंस नहीं है, इसलिए यह अक्सर होलिस्टिक थैरेपी के नाम पर चलता है। पुलिस इसे सेक्स वर्क के रूप में भी देख सकती है, खासकर यदि इसमें अनैतिक गतिविधियां सामने आएं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों वयस्क सहमति से हैं और कोई जबरदस्ती नहीं है, तो यह अपराध नहीं माना जाएगा।
मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण और सामाजिक प्रभाव
मनोवैज्ञानिक डॉ उज्ज्वल सरदेसाई का कहना है कि कडलिंग से ऑक्सीटोसिन हार्मोन रिलीज होता है, जो अकेलेपन को कम कर सकता है। लेकिन पैसे देकर अनजान व्यक्ति से लंबे समय तक गले मिलना खतरनाक भी हो सकता है, क्योंकि इससे भावनात्मक जटिलताएं और भ्रम पैदा हो सकते हैं।
अकेलापन और उसकी जटिलताएं
शहर में बढ़ते अकेलेपन को दूर करने के लिए यह सेवा एक विकल्प हो सकती है, लेकिन यह असल में एक ठंडी और बासी दोस्ती जैसी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सेवा कभी-कभी मनोवैज्ञानिक और सामाजिक जटिलताओं को जन्म दे सकती है, और इसकी सीमाओं को समझना जरूरी है।









