अडानी रियल्टी मामले में युवराज सिंह मनचंदा की हत्या से जुड़ी FIR का खुलासा
अडानी रियल्टी के प्रबंधक युवराज सिंह मनचंदा की हत्या के मामले में आजतक के पास एक विशेष FIR मौजूद है, जिसमें कई गंभीर आरोप दर्ज हैं। इस FIR में कहा गया है कि अन्या वत्स ने रिटायर्ड RAW (Research and Analysis Wing) प्रमुख सामंत गोयल को अपना चाचा बताया था। शिकायत में यह भी आरोप है कि उसने अनिल गुप्ता को अपने स्थानीय संरक्षक के रूप में प्रस्तुत किया, जो ज्वाइंट सेक्रेटरी हैं। इन संपर्कों का उल्लेख कर शिकायतकर्ता को यह भरोसा दिलाया गया कि सरकारी एजेंसियों से जुड़ी कार्रवाई को रोका या समाप्त किया जा सकता है।
फर्जी सरकारी नोटिस और धोखाधड़ी का मामला
यह FIR 16 अगस्त 2026 को दर्ज हुई, यानी युवराज की मौत से लगभग एक माह पहले ही अन्या वत्स और संयम सचदेव के खिलाफ धोखाधड़ी का एक अलग मामला भी दर्ज किया गया था। FIR में भारतीय दंड संहिता की धारा 318(4) और 61(2) का उल्लेख है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि अन्या वत्स खुद को गृह मंत्रालय, NIA (National Investigation Agency), ED (Enforcement Directorate) और RAW जैसे उच्च अधिकारियों से जुड़ा बताती थीं। इन दावों के आधार पर वह शिकायतकर्ता को यह विश्वास दिलाने का प्रयास करती थीं कि उसके खिलाफ चल रही सरकारी कार्रवाई को रोका या समाप्त किया जा सकता है।
धोखाधड़ी और धमकी भरे संदेशों का खुलासा
शिकायत के अनुसार, व्हाट्सएप के माध्यम से कुछ फर्जी सरकारी नोटिस भेजे गए, जिससे शिकायतकर्ता को लगा कि उसके खिलाफ ED (Enforcement Directorate) की जांच चल रही है। इसके बाद सरकारी जुर्माने और सेटलमेंट फीस के नाम पर रकम की मांग की गई। अक्टूबर 2024 से अगस्त 2025 के बीच करीब 1.25 करोड़ रुपये अन्या वत्स के HDFC बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए, जो कथित तौर पर सरकारी जुर्माने और सेटलमेंट फीस के रूप में लिए गए थे। शिकायत में 29 नवंबर 2024 की एक घटना का भी जिक्र है, जिसमें कहा गया कि उस दिन सभी मामले समाप्त होने की बात कही गई और 96,89,700 रुपये की मांग की गई। साथ ही एक लाख रुपये अलग से भी मांगे गए।
इसके बाद अगस्त 2025 में कहा गया कि शिकायतकर्ता ने सरकारी एजेंसियों को 13.85 करोड़ रुपये दिए हैं, और फिर रकम वापस मांगी गई। शिकायतकर्ता का दावा है कि उस पर कुल 26 करोड़ रुपये का बकाया होने का भी आरोप लगाया गया।
शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि पैसे की मांग के साथ धमकी भरे संदेश भेजे गए, जिसमें उसे और उसके परिवार को परिणाम भुगतने की धमकी दी गई। इस FIR में संयम सचदेव का नाम भी शामिल है, जो कथित तौर पर उस समूह का हिस्सा था जिसने फर्जी सरकारी संदेशों का इस्तेमाल कर पैसे की मांग की। अधिकारियों और एजेंसियों की पहचान का सहारा लेकर पैसे की मांग को असली दिखाने का प्रयास किया गया।
युवराज हत्याकांड से जुड़ी FIR का संबंध और जांच प्रक्रिया
युवराज सिंह की हत्या का मामला 6 सितंबर को उनके परिवार के साथ दिल्ली के लाजपत नगर में शादी की खरीदारी के दौरान शुरू हुआ। शाम को उन्होंने परिवार को बताया कि उनका गुरुग्राम में एक मीटिंग है, जिसके बाद वह वहां चले गए। पुलिस के अनुसार, वहां उनकी मुलाकात पूर्व सहकर्मी अन्या वत्स से हुई, और दोनों एक मॉल के बाहर मिले। युवराज अपनी कार से उतरकर अन्या की कार में बैठ गए।
पुलिस का कहना है कि इस मुलाकात के दौरान पैसे के लेन-देन को लेकर विवाद हुआ, जिसके बाद युवराज की गर्दन में दो गोलियां मारी गईं। अन्या वत्स ने पूछताछ में इस बात को स्वीकार किया है कि उसने युवराज को गोली मारी, हालांकि यह बयान अभी जांच का हिस्सा है और पुलिस अन्य सबूतों से इसकी पुष्टि कर रही है। हत्या के बाद युवराज का शव कार में रखा गया और बाद में उसे गुरुग्राम के सेक्टर-70 के एक नाले में फेंक दिया गया।
आरोपियों की गिरफ्तारी और जांच का वर्तमान चरण
जांच के अनुसार, इसके बाद अन्या वत्स और संयम सचदेव उत्तराखंड चले गए, जहां उनकी लोकेशन मिली। दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया है। युवराज के घर न लौटने पर उनकी बहन ने 11 सितंबर को लाजपत नगर थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने कॉल रिकॉर्ड और अन्य सुरागों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया। नाले से मिले युवराज के शव की पहचान कर ली गई है। अब पुलिस उनके पुराने संबंध, बैंक ट्रांजेक्शन्स, कॉल रिकॉर्ड और अन्य सबूतों की जांच कर रही है। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि 16 अगस्त को दर्ज FIR का युवराज की हत्या से कोई संबंध है या नहीं।










