प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग के बीच महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ भरोसेमंद संबंधों पर जोर देते हुए तीन मुख्य ‘म्यूचुअल’ मान्यताओं पर चर्चा की। ये मान्यताएँ हैं- पारस्परिक सम्मान, संवेदनशीलता और हित। भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच मतभेदों को विवाद में नहीं बदलना चाहिए।
यह बैठक ब्रिक्स (BRICS) सम्मेलन के दौरान दिल्ली में आयोजित हुई, जिसमें दोनों नेताओं ने लगभग पचास मिनट तक द्विपक्षीय चर्चा की। यह मुलाकात गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद पहली बार हुई, और दोनों नेताओं के बीच संबंधों में सुधार के संकेत दिख रहे हैं। इस दौरान दोनों ने रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से संबंधों को मजबूत बनाने पर बल दिया।
संबंधों को मजबूत बनाने के लिए रणनीति और विवादों का समाधान
दोनों नेताओं ने अगस्त 2025 में तियानजिन में हुई पिछली बैठक के बाद से भारत-चीन संबंधों में हुई प्रगति का स्वागत किया। उन्होंने फिर से कहा कि दोनों देशों को अपने संबंधों को दीर्घकालिक और रणनीतिक दृष्टिकोण से देखना चाहिए। मतभेदों को विवाद का रूप नहीं देना चाहिए, यह दोनों नेताओं का मुख्य संदेश रहा।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर विशेष बल दिया कि दोनों पक्षों को तीन ‘म्यूचुअल’ सिद्धांतों का पालन करना चाहिए: सम्मान, संवेदनशीलता और हित। उन्होंने यह भी कहा कि सीमा से जुड़े मुद्दों पर मौजूदा समझौतों और सहमति का सम्मान जरूरी है। दोनों नेताओं ने सीमा विवाद के समाधान के लिए निष्पक्ष और आपसी सहमति पर आधारित समाधान का आश्वासन दिया, जो दोनों देशों के दीर्घकालिक हितों और राजनीतिक दृष्टिकोण से मेल खाता हो।
सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता का महत्व
प्रधानमंत्री मोदी ने सीमा क्षेत्र में शांति और स्थिरता को विकास का आधार बताया। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती इलाकों में शांति बनाए रखना दोनों देशों के संबंधों के निरंतर विकास के लिए अनिवार्य है। दोनों नेताओं ने सीमा विवाद के समाधान के लिए निष्पक्ष और आपसी सहमति से हल निकालने का संकल्प व्यक्त किया, जो दोनों देशों के दीर्घकालिक हितों और जनता के स्वार्थ में हो।











