हरियाणा में आईपीएस अधिकारी वाई पूरन कुमार की आत्महत्या पर राजनीतिक विवाद
हरियाणा के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वाई पूरन कुमार की आत्महत्या ने राज्य में राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने इस मामले को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार दलित अधिकारियों के करियर को लेकर असहिष्णु है और उन्हें प्रगति करने से रोकने का प्रयास कर रही है।
आरोपों का सिलसिला और पुलिस जांच
पुलिस सूत्रों के अनुसार, वाई पूरन कुमार के सुसाइड नोट में गंभीर आरोप दर्ज थे, जिनमें उन्होंने अपने ऊपर हो रहे उत्पीड़न और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। इस मामले में डीजीपी समेत कुल 13 अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इन अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने अधिकारी के साथ अनुचित व्यवहार किया और उनके खिलाफ साजिश रची।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
इस घटना के बाद से ही राजनीतिक दलों के बीच तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। विपक्षी दलों का कहना है कि यह घटना सरकार की कार्यशैली और दलित अधिकारियों के प्रति असमानता का परिणाम है। वहीं, सरकार का दावा है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है। इस घटना ने हरियाणा में पुलिस प्रशासन और दलित समुदाय के बीच बढ़ती असंतोष को उजागर किया है।











