दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने स्वतंत्र भारद्वाज को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा
दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने स्वतंत्र भारद्वाज को आपत्तिजनक बयान देने और जंतर मंतर पर प्रदर्शन के दौरान एक प्रदर्शनकारी के पिता के साथ मारपीट के आरोप में 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। गिरफ्तारी के बाद, दिल्ली हाई कोर्ट में उनके खिलाफ हेबियस कॉर्पस याचिका भी दायर की गई, जिस पर आज सुनवाई हुई।
हेबियस कॉर्पस याचिका पर हुई सुनवाई और गिरफ्तारी का विवरण
दिल्ली हाई कोर्ट ने स्वतंत्र भारद्वाज की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को स्वीकार करते हुए मामले की सुनवाई का आदेश दिया। यह याचिका तब दायर की जाती है जब किसी व्यक्ति को गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में रखने का संदेह हो। इस प्रक्रिया में अदालत से हिरासत की वैधता की जांच की जाती है।
स्वतंत्र भारद्वाज को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से 5 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। उसके बाद उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया। उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (BNS), POCSO और आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज है, जिसमें नाबालिग से यौन उत्पीड़न, पीछा करने, धमकाने और महिला की गरिमा को नुकसान पहुंचाने के आरोप शामिल हैं।
संबंधित खबरें और विवाद की शुरुआत
यह विवाद तब बढ़ा जब नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद नाबालिग पीड़िता को लेकर संसद मार्ग थाने पहुंचे। इसके बाद, पीड़िता के पिता की शिकायत पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की। घटना का मुख्य कारण दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हुई मारपीट थी, जिसमें स्वतंत्र भारद्वाज पर प्रदर्शनकारी के पिता के साथ मारपीट करने का आरोप लगा। इंटरनेट पर एक वीडियो भी सामने आया, जिसमें स्वतंत्र भारद्वाज को मारपीट की बात कहते सुना गया।
इसके अलावा, चिराग पासवान ने भी कहा कि स्वतंत्र ने उनके नाम का गलत इस्तेमाल किया है और इसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की बात कही। वर्तमान में, स्वतंत्र भारद्वाज को 21 सितंबर तक न्यायिक हिरासत में रखा गया है।










