मध्य प्रदेश में IAS अधिकारी का लगातार ट्रांसफर विवाद
मध्य प्रदेश (MP) में एक IAS अधिकारी के बार-बार ट्रांसफर का मामला सुर्खियों में है। नेहा मारव्या सिंह ने एक साल के भीतर चौथी बार अपने ट्रांसफर को लेकर नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने अपने अनुभव को साझा करते हुए सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
नेहा मारव्या सिंह का ट्रांसफर और उनके आरोप
5 सितंबर 2026 की ट्रांसफर लिस्ट का जिक्र करते हुए नेहा मारव्या सिंह ने बताया कि वह अत्यंत परेशान हैं। उन्होंने कहा कि महज 50 दिनों में ही उन्हें अपने नए पद से हटा दिया गया। उन्होंने सवाल किया कि आखिर एक IAS अधिकारी इतनी कमजोर कैसे हो सकता है कि उसके सहयोगी ही उसके ट्रांसफर का प्रयास कर सकें? नेहा ने यह संदेश अपने वरिष्ठ अधिकारियों और सहयोगियों के समूह में साझा किया है। इसमें उन्होंने विस्तार से अपने अनुभव का वर्णन किया कि कैसे उनके मातहत उनके खिलाफ विद्रोह जैसी स्थिति बना रहे हैं।
सिस्टम और प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे सवाल
नेहा मारव्या सिंह ने अपने संदेश की शुरुआत में कहा कि वह समझती हैं कि एक IAS अधिकारी होने के नाते उन्हें कहीं भी तैनात किया जा सकता है। उन्होंने हमेशा सरकारी आदेशों का सम्मान किया है, लेकिन इस बार का ट्रांसफर उन्हें बहुत निराश कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके साथ काम कर रहे कुछ कर्मचारी उनके खिलाफ विद्रोह का माहौल बना रहे हैं। इन कर्मचारियों ने कथित तौर पर धमकी दी कि उनका ट्रांसफर कर दिया जाएगा। नेहा ने बताया कि उन्होंने विभाग में हुई अनुशासनहीनता और दुर्व्यवहार की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दी थी, लेकिन इसके बजाय उन्हें ही ट्रांसफर कर दिया गया।
नेहा ने सवाल उठाया कि क्या एक IAS अधिकारी इतना कमजोर है कि उसके मातहत कर्मचारी भी उसके खिलाफ विद्रोह कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि किसी अधिकारी का नई जगह पर ज्वाइन करने के महज एक महीने के भीतर ही ऐसी स्थिति बन जाना सामान्य बात नहीं है। उनका मानना है कि नए पद की जिम्मेदारी समझने में समय लगता है, लेकिन उन्हें तुरंत ही हटा दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि उनके मातहतों को यह भी महसूस होने लगा है कि यदि वह उनके अनुसार काम नहीं करेंगी, तो उनका ट्रांसफर संभव है। यही बात उन्हें सबसे ज्यादा परेशान कर रही है।
नेहा ने अपने लंबे समय तक चुप्पी और धैर्य बनाए रखने का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उन्हें लंबे समय तक किनारे रखा गया और पर्याप्त काम नहीं दिया गया। उनका मानना है कि समय के साथ परिस्थितियां बेहतर हो सकती थीं, लेकिन स्थिति और बिगड़ती चली गई। अब उनके मातहत ही उन्हें ट्रांसफर कराने की धमकी देने लगे हैं। अंत में, नेहा मारव्या सिंह ने कहा कि सिस्टम उन्हें विफल कर चुका है और हर बार साजिशकर्ता जीत जाते हैं। उनका यह बयान प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।









