इंदौर में ‘वंदे मातरम’ को लेकर विवाद और राजनीतिक जंग
इंदौर में 19 सितंबर को होने वाले ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम से पहले राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। इस विवाद का केंद्र बीजेपी नेता और संस्था पुरुषार्थ के अध्यक्ष नानूराम कुमावत हैं, जिन्होंने मांग की थी कि इस कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम’ के सभी छह छंदों का सामूहिक गायन होना चाहिए।
हालांकि, इस मुद्दे पर खुद बीजेपी नेता ही असहज नजर आए। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में वे पत्रकारों के सामने ‘वंदे मातरम’ का पूरा गीत नहीं गा सके। वीडियो में दिख रहा है कि वे शुरुआत की दो लाइनों को भी सही से नहीं गा पाए और अंत में कई शब्द भूल गए। यह घटना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है।
राष्ट्रगीत के पूरे छंदों की मांग और राजनीतिक प्रतिक्रिया
संस्था ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस अपने कार्यक्रमों में केवल दो छंद ही गाती रही है। इसने राहुल गांधी और मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी (MPCC) के अध्यक्ष जीतू पटवारी को पत्र भेजकर 10 सितंबर तक इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख जाहिर करने को कहा है। यदि उनकी मांग पूरी नहीं हुई, तो वे कार्यक्रम का बहिष्कार करने की चेतावनी भी दे चुके हैं।
पत्रकारों ने जब बीजेपी नेता से पूछा कि क्या वे खुद ‘वंदे मातरम’ के पूरे छंद गाकर सुनाएंगे, तो वे असहज हो गए। कैमरे के सामने उन्होंने शुरुआत की दो लाइनों को भी सही से नहीं गाया और अंत में कई शब्द भूल गए। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर यह वीडियो वायरल हो गया है, जिससे राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है।
राजनीतिक माहौल में बढ़ती गर्माहट और राष्ट्रीय सम्मान का मुद्दा
आयोजकों का कहना है कि यह कार्यक्रम किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सम्मान और राष्ट्रभावना का प्रतीक है। वहीं, बीजेपी नेता के वीडियो के वायरल होने के बाद कांग्रेस को भी पलटवार का मौका मिल गया है। 19 सितंबर को होने वाले इस भव्य आयोजन से पहले ‘वंदे मातरम’ को लेकर विवाद ने राजनीतिक तापमान को काफी बढ़ा दिया है।










