ग्वालियर में पहली बार सफल किडनी ट्रांसप्लांट का इतिहास बना
विवाह के दौरान लिए गए सात फेरे केवल रस्म नहीं हैं, बल्कि जीवनभर साथ निभाने का वादा भी होते हैं। इसी परंपरा का पालन करते हुए 55 वर्षीय मीना गुप्ता ने अपने पति कृष्णकांत गुप्ता की जान बचाने के लिए अपनी किडनी दान करने का साहसिक निर्णय लिया। जब उनके पति की दोनों किडनियां खराब हो गईं और जीवनरक्षक ट्रांसप्लांट आवश्यक हो गया, तो उन्होंने बिना किसी हिचक के अपने अंग का त्याग कर दिया। उनका कहना था, “आखिरी सांस तक अपने जीवनसाथी को कुछ नहीं होने दूंगी।” इस घटना ने ग्वालियर-चंबल क्षेत्र की मेडिकल हिस्ट्री में एक नया अध्याय जोड़ा है।
सभी जरूरी जांच और सफल ऑपरेशन
छतरपुर निवासी कृष्णकांत गुप्ता की दोनों किडनियां पहले ही खराब हो चुकी थीं। परिवार की सहमति के बाद, उनकी पत्नी मीना ने अपने पति को किडनी दान करने का फैसला किया। इसके लिए दोनों का मेडिकल परीक्षण, काउंसलिंग, अनुकूलता जांच और ट्रांसप्लांट से जुड़ी सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी की गईं। 29 अगस्त को दोनों को सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया।
रविवार सुबह लगभग 8:30 बजे से ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया शुरू हुई। नेफ्रोलॉजी, यूरोलॉजी और एनेस्थीसिया विभाग के विशेषज्ञों की टीम ने मिलकर करीब साढ़े छह घंटे तक जटिल ऑपरेशन किया। इस दौरान मरीज और डोनर की स्थिति पर लगातार नजर रखी गई। पूरी प्रक्रिया अस्पताल के निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार सफलतापूर्वक पूरी हुई, और कोई बड़ी समस्या नहीं आई।
आयुष्मान योजना से मुफ्त ट्रांसप्लांट और संक्रमण से सुरक्षा
कृष्णकांत गुप्ता का किडनी ट्रांसप्लांट आयुष्मान योजना के तहत नि:शुल्क किया गया, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को भी उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सुविधा मिल सकी है। ट्रांसप्लांट के बाद संक्रमण से बचाव के लिए अस्पताल में विशेष व्यवस्था की गई है। कृष्णकांत के लिए अलग आईसीयू की व्यवस्था की गई है, जिसमें सेंट्रलाइज्ड एसी सिस्टम के बावजूद विशेष एसी का प्रयोग किया गया है। मरीज के कमरे में केवल चिकित्सकों और अधिकृत स्टाफ को ही प्रवेश की अनुमति है, और उन्हें सात दिनों तक विशेष निगरानी में रखा जाएगा।
कृष्णकांत के बेटे सुमित ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान कोई परेशानी नहीं हुई। उन्होंने अस्पताल की पूरी टीम का आभार व्यक्त किया और कहा कि यह संभव हो पाया है उनके प्रयासों और योजना के कारण। इस सफलता ने ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में मेडिकल क्षेत्र में नई उम्मीद जगा दी है।











