सोन नदी जल विवाद का स्थायी समाधान हुआ संभव
बिहार और झारखंड के बीच दशकों से चले आ रहे सोन नदी के जल बंटवारे का विवाद आखिरकार समाप्त हो गया है। नई दिल्ली में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में दोनों राज्यों ने इस मुद्दे का स्थायी समाधान निकालते हुए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह ऐतिहासिक निर्णय जल संसाधनों के न्यायसंगत वितरण की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
दोनों राज्यों के बीच जल बंटवारे का ऐतिहासिक फैसला
सोन नदी के जल बंटवारे को लेकर लंबे समय से चली आ रही जटिलता का अंत हुआ है। इस समझौते के तहत दोनों राज्यों के बीच कुल 7.75 मिलियन एकड़ फीट पानी का बंटवारा तय किया गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी मौजूद रहे। इस फैसले से 26 वर्षों से लंबित विवाद का समाधान हुआ है, जो बिहार के हित में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
1973 के बाणसागर समझौते के बाद पहली बार हुआ स्पष्टता
यह पहली बार है जब 1973 में हुए बाणसागर समझौते के बाद बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी के जल में हिस्सेदारी पूरी तरह से स्पष्ट हुई है। झारखंड की ओर से लगातार वाजिब हिस्सेदारी की मांग की जा रही थी, क्योंकि नदी का उद्गम स्थल और बड़ा कैचमेंट क्षेत्र उनके क्षेत्र में आता है। वहीं, बिहार सरकार 1973 के समझौते को आधार बनाकर अपने 7.75 MAF पानी का दावा कर रही थी। इस विवाद के कारण ही लगभग 53 वर्षों से इंद्रपुरी जलाशय परियोजना भी अटकी हुई थी, लेकिन अब दोनों राज्यों के बीच सहमति बन जाने के बाद इस परियोजना का कार्य शुरू हो सकेगा।











