बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी का पानी विवाद सुलझने की उम्मीद
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी आज दिल्ली के दौरे पर हैं। वे कर्तव्य भवन में गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में होने वाली महत्वपूर्ण बैठक में भाग लेंगे। इसके साथ ही, वे जलशक्ति मंत्री से भी मुलाकात करेंगे। सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में सोन नदी के पानी के बंटवारे को लेकर एक महत्वपूर्ण समझौता हो सकता है।
सोन नदी के पानी का विवाद और संभावित समझौता
बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी के पानी को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब बिहार का विभाजन हुआ और झारखंड का गठन हुआ। दोनों राज्यों के बीच इस नदी के पानी का बंटवारा एक जटिल मुद्दा रहा है। अब खबरें हैं कि दोनों राज्य एक नए फॉर्मूले पर सहमत हो सकते हैं, जिसमें सोन नदी के पानी का उचित बंटवारा सुनिश्चित किया जाएगा।
बंटवारे का ऐतिहासिक संदर्भ और वर्तमान स्थिति
1973 के बाणसागर समझौते के अनुसार बिहार का हिस्सा तय किया गया था, जिसमें मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और अविभाजित बिहार के बीच सोन नदी का पानी साझा किया गया था। उस समय बिहार को कुल 7.75 मिलियन एकड़-फीट पानी प्राप्त होता था। वर्तमान में, इस समझौते के तहत बिहार को 5.75 मिलियन एकड़-फीट और झारखंड को 2.0 मिलियन एकड़-फीट पानी मिलने का प्रावधान है। अब दोनों राज्य इस विवाद को सुलझाने के लिए एक नए फॉर्मूले पर सहमत हो सकते हैं, जिससे पानी का न्यायसंगत वितरण सुनिश्चित हो सके।










