दतिया कलेक्टर का रक्षाबंधन पर अनूठा प्रयास
दतिया (Datia) के कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े ने अपने परिवार के साथ शहर की एक गरीब बस्ती में पहुंचकर रक्षाबंधन का त्योहार मनाया। उन्होंने अपनी पत्नी और बेटे के साथ मिलकर स्थानीय परिवारों, महिलाओं और छोटी बच्चियों के बीच जाकर इस पर्व की खुशियों को साझा किया। इस दौरान नन्ही बच्चियों और बहनों ने प्रेम और सम्मान के साथ कलेक्टर और उनके बेटे की कलाई पर रक्षासूत्र बांधा।
कलेक्टर ने न केवल इन महिलाओं और बच्चियों का हाल-चाल जाना, बल्कि उनके पैर छूकर आशीर्वाद भी लिया। यह स्नेहपूर्ण पल हर किसी के दिल को छू गया और सामाजिक सद्भाव का प्रतीक बन गया। इस अनूठे प्रयास ने दिखाया कि सरकारी अधिकारी भी अपनेपन और संस्कारों के साथ समाज से जुड़ सकते हैं।
कलेक्टर की भावना और सोशल मीडिया पर प्रशंसा
स्वप्निल वानखेड़े ने इन खूबसूरत क्षणों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा करते हुए लिखा, “जब बस्ती की बहनों और नन्ही बच्चियों ने प्यार से राखी बांधी, तो यह त्योहार और भी खास बन गया। रक्षाबंधन की असली खूबसूरती परंपराओं में नहीं, बल्कि उन रिश्तों और अपनत्व में है, जो इन छोटे धागों से जुड़े होते हैं।” उन्होंने कहा कि इस दिन परिवार और समाज के बीच का प्रेम और सम्मान और भी मजबूत हो जाता है।
उनकी इस पहल को सोशल मीडिया पर खूब सराहा गया। यूजर्स ने उनकी सादगी और संस्कारों की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह कदम समाज में सकारात्मक बदलाव का प्रतीक है। एक यूजर ने लिखा, “कभी-कभी जो घमंड और पावर का गुरुर हमारे मन में होता है, वह इन छोटे-छोटे संस्कारों को देखकर खत्म हो जाता है।” वहीं, दूसरे ने कहा कि इस तरह का सच्चा सम्मान रुपये और गिफ्ट से कहीं अधिक मूल्यवान है।
सामाजिक जागरूकता और संस्कारों का संदेश
यह घटना यह दर्शाती है कि पद और प्रतिष्ठा चाहे जो भी हो, अपने कर्तव्य और संस्कारों से विमुख नहीं होना चाहिए। इस तरह के प्रयास समाज में प्रेम, सद्भाव और एकता को बढ़ावा देते हैं। दतिया के इस कलेक्टर का यह कदम न केवल प्रशंसनीय है, बल्कि यह युवाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन सकता है। रक्षाबंधन जैसे त्योहारों का असली उद्देश्य भी यही है कि हम अपनेपन और सम्मान के साथ एक-दूसरे के करीब आएं।









