सूरत पुलिस का साइबर ठगी का बड़ा खुलासा
सूरत (Surat) पुलिस ने हाल ही में एक बड़े साइबर फ्रॉड नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जिसने हजारों मोबाइल उपकरणों को निशाना बनाकर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी की है। इस जालसाजी में इस्तेमाल होने वाली APK फाइलों की संख्या 336 तक पहुंच गई है, जिनके माध्यम से करीब 31,174 मोबाइल डिवाइस तक पहुंच बनाई गई। इन फाइलों के जरिए लगभग 1,06,643 बैंक ट्रांजेक्शन हुए हैं, जिनमें कुल मिलाकर 125 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी का आंकड़ा सामने आया है। इस मामले में चार आरोपियों को बिहार के पटना (Patna) से गिरफ्तार किया गया है।
फर्जी APK के जरिए साइबर ठगी का खेल
मामला तब उजागर हुआ जब एक पीड़ित ने सूरत साइबर क्राइम सेल में शिकायत दर्ज कराई। उसे WhatsApp पर एक APK फाइल भेजी गई थी, जिसमें बताया गया कि यह एक बैंकिंग एप है। पीड़ित ने फाइल डाउनलोड कर ली, और तुरंत ही उसके मोबाइल पर आरोपियों की पहुंच बन गई। इसके बाद उसके बैंक खाते से लगभग पांच लाख रुपये ट्रांसफर कर लिए गए। जांच में पता चला कि यह गैंग अलग-अलग बैंक, सरकारी योजनाओं, RTO चालान, अस्पताल और कस्टमर सपोर्ट जैसे नामों से फर्जी एप्लिकेशन बनाता था। इन फाइलों का लोगो और आइकन भी इस तरह तैयार किया जाता था कि पहली नजर में ये असली एप जैसे ही दिखें। इन APK फाइलों को WhatsApp और Telegram के जरिए भेजा जाता था, और जैसे ही कोई इन्हें इंस्टॉल करता, ठग उसके फोन की जानकारी हासिल कर लेते थे। इसमें SMS, कॉन्टैक्ट्स, कॉल लॉग और फोटो जैसी संवेदनशील जानकारियां भी शामिल थीं। बैंकिंग विवरण मिलते ही खाते से पैसा निकालकर म्यूचुअल फंड और क्रेडिट कार्ड में ट्रांसफर किया जाता था, और फिर रकम नकद के जरिए आगे पहुंचाई जाती थी।
गैंग का नेटवर्क और गिरफ्तारी की प्रक्रिया
सूरत पुलिस की जांच ने सबसे पहले उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के कानपुर (Kanpur) तक पहुंच बनाई। वहां से पुलिस ने 18 वर्षीय APK डेवलपर रोहित को गिरफ्तार किया, जो अलग-अलग साइबर अपराधियों की मांग के अनुसार फर्जी APK तैयार करता था। उसकी जांच में उसके लैपटॉप और मोबाइल से 100 से अधिक फाइलें मिलीं, जिनसे लगभग 64-65 करोड़ रुपये के साइबर फ्रॉड का आंकड़ा सामने आया। इसके बाद, पुलिस ने जामताड़ा (Jamtara) के नेटवर्क तक पहुंच बनाई, जहां से यह फर्जी एप्लिकेशन तैयार किए जाते थे। इस नेटवर्क का मुख्य कड़ी जहुरुल अंसारी उर्फ चांद था, जिसे पुलिस ने ट्रेन से यात्रा करते हुए ट्रैक किया। जामताड़ा से देवघर (Deoghar) और फिर पटना (Patna) तक करीब 2500 किलोमीटर का पीछा कर पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनमें जहुरुल अंसारी, राजन कुमार, आदित्यराज उर्फ अमन और समीर उर्फ शक्तिमान शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि चांद APK फाइलें खरीदता था और जामताड़ा के अपराधियों को बेचता था। जांच में पता चला कि इन फाइलों की खरीद-फरोख्त से जुड़े करीब 1248 मामलों का कनेक्शन है।
अंत में, पुलिस को इन फाइलों से जुड़े डेटा में 336 APK फाइलें मिलीं, जिनको 31,174 मोबाइल उपकरणों पर इंस्टॉल किया गया था। इन फाइलों के जरिए करीब 125 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है। सबसे अधिक इस्तेमाल RTO चालान के नाम से किया गया, जिसमें 59 APK फाइलें 11,056 डिवाइसों में इंस्टॉल हुईं और इनसे जुड़े ट्रांजेक्शन की रकम लगभग 42.31 करोड़ रुपये थी। सूरत पुलिस ने जनता को चेतावनी दी है कि WhatsApp या SMS पर बैंक, सरकारी योजनाओं, RTO चालान, KYC या कस्टमर सपोर्ट के नाम से आए किसी भी APK को डाउनलोड न करें। केवल आधिकारिक Google Play Store या Apple App Store से ही एप्लिकेशन डाउनलोड करें।











