संसदीय समिति ने सोशल मीडिया और छात्रों के मुद्दों पर की चर्चा
संसद की स्टैंडिंग कमेटी ऑन कम्युनिकेशन एंड इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने आजतक को दिए अपने इंटरव्यू में कई महत्वपूर्ण विषयों पर खुलकर बात की। उन्होंने झारखंड में चल रहे छात्र आंदोलन और सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स पर विपक्ष के दोहरे रवैये का आरोप लगाया।
झारखंड के छात्र आंदोलन और सोशल मीडिया पर विवाद
दुबे ने कहा कि जो यूट्यूबर्स भारत विरोधी मामलों को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत करते हैं, वे झारखंड के छात्रों के मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए बताया कि इरफान नाम का व्यक्ति नौवीं फेल है और ईंट-भट्ठे पर काम करता है। उनके बेटे सलीम भी दूसरी कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़कर मजदूरी में लग गए हैं। दुबे ने सवाल किया कि न ही इरफान को नीट पास करना था और न ही उनके बेटे को, फिर भी उन्हें हीरो बना दिया गया है।
छात्रों के प्रदर्शन और सरकार की अनदेखी
उन्होंने कहा कि पिछले 15 से 20 दिनों से झारखंड में धूप, गर्मी और बरसात के बीच छात्र लगातार सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन इस पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। साथ ही, उन्होंने विपक्ष पर भी सवाल उठाए कि क्यों वे झारखंड जाकर छात्रों का समर्थन नहीं कर रहे हैं।
मीडिया प्लेटफार्म्स और सरकार की नीतियों पर निशाना
दुबे ने मेटा (Meta) के प्रमुख मार्क जुकरबर्ग पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो पांच घंटे तक डिलीट रहा, और जब तक जुकरबर्ग माफी नहीं मांगते, तब तक मेटा को माफ करने का सवाल ही नहीं उठता। इसके अलावा, उन्होंने गूगल (Google) पर भी आरोप लगाए कि भारतीय कानून के तहत महिलाओं से संबंधित आपत्तिजनक कंटेंट और पोर्नोग्राफी को नहीं दिखाया जाना चाहिए, लेकिन मेटा इन कंटेंट्स को बढ़ावा देता है।
गूगल और सोशल मीडिया की प्राइवेसी पर खुलासे
दुबे ने बताया कि गूगल ने कमेटी में स्वीकार किया है कि जो लोग गूगल या सफारी (Safari) का इस्तेमाल करते हैं, उनकी बातें सुनता है और उनकी प्राइवेसी का कोई संरक्षण नहीं है। उन्होंने कहा कि इन प्लेटफार्म्स पर मौजूद सामग्री और उपयोगकर्ता की जानकारी का दुरुपयोग हो रहा है, जो भारतीय कानून के खिलाफ है।










