भारत में जन्म और मृत्यु पंजीकरण में बड़े बदलाव की तैयारी
देश में नागरिकों के जन्म और मृत्यु के रिकॉर्ड को लेकर सरकार एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। इस बार लोकसभा में गृह मंत्री अमित शाह ‘जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक 2026’ पेश करेंगे। इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य पूरे भारत में जन्म और मृत्यु के दस्तावेजों को डिजिटल रूप में संग्रहित करना है, ताकि फर्जी कागजात पर रोक लगाई जा सके। इस नए कानून के लागू होने के बाद जन्म प्रमाण पत्र को जीवन का सबसे आवश्यक और मुख्य दस्तावेज माना जाएगा।
रजिस्ट्रेशन में देरी पर सख्त नियम और कोर्ट का प्रावधान
अक्सर देखा जाता है कि बच्चे के जन्म या किसी की मृत्यु के कई वर्षों बाद भी रजिस्ट्रेशन नहीं कराया जाता। सरकार अब इस लापरवाही को रोकने के लिए सख्त नियम ला रही है। नए बिल के अनुसार, यदि रजिस्ट्रेशन में एक से दो साल की देरी होती है, तो इसके लिए जिला मजिस्ट्रेट, उप-मंडल मजिस्ट्रेट (SDM) या कार्यकारी मजिस्ट्रेट से लिखित अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
यदि मामला दो साल से अधिक पुराना हो जाता है, तो इसे सीधे कोर्ट में भेजा जाएगा। वहां प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद ही जन्म या मृत्यु का प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा। साथ ही, फर्जीवाड़े को रोकने के लिए संबंधित अधिकारी पूरी जांच और वेरिफिकेशन करेंगे, ताकि रजिस्ट्रेशन में किसी भी तरह की देरी को गंभीरता से लिया जाए।
डिजिटल डेटाबेस और मुख्य दस्तावेज के रूप में जन्म प्रमाण पत्र
इस कानून के तहत देशभर के जन्म और मृत्यु के रिकॉर्ड को एक केंद्रीय डिजिटल डेटाबेस से जोड़ा जाएगा। इससे देश के किसी भी कोने में होने वाली जन्म और मृत्यु की जानकारी एक ही स्थान पर ऑनलाइन उपलब्ध होगी। इस डेटाबेस को मजबूत बनाने के लिए इसे मतदाता सूची, राशन कार्ड, पासपोर्ट और अन्य राष्ट्रीय पहचान पत्रों से लिंक किया जाएगा।
इससे यह लाभ होगा कि जैसे ही कोई नागरिक 18 वर्ष का होगा, उसका नाम आसानी से वोटर लिस्ट में जुड़ जाएगा। वहीं, यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है, तो सरकारी रिकॉर्ड से उसका नाम तुरंत हटाया जा सकेगा, जिससे सरकारी योजनाओं में गड़बड़ियों को रोका जा सकेगा।
अब जन्म प्रमाण पत्र ही सबसे मुख्य दस्तावेज माना जाएगा। पहले स्कूल में एडमिशन, ड्राइविंग लाइसेंस या सरकारी नौकरी के लिए अलग-अलग दस्तावेजों का इस्तेमाल होता था, लेकिन इस बिल के लागू होने के बाद यह एकमात्र आवश्यक दस्तावेज बन जाएगा। इससे न केवल सरकारी प्रक्रिया आसान होगी, बल्कि भ्रष्टाचार में भी कमी आएगी।
सरकार का कहना है कि डिजिटल व्यवस्था से नागरिकों को प्रमाण पत्र के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। वे घर बैठे ही ऑनलाइन माध्यम से अपने दस्तावेज प्राप्त या डाउनलोड कर सकेंगे, जिससे समय की बचत होगी और पारदर्शिता बढ़ेगी।










