दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में वेंटिलेटर की स्थिति पर स्वास्थ्य मंत्री का बयान
दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पंकज सिंह ने इंडिया टुडे की आरटीआई रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि राजधानी के अस्पतालों में वेंटिलेटर की स्थिति को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि दिल्ली का स्वास्थ्य सेवा तंत्र अब पहले से कहीं अधिक मजबूत और प्रभावी हो चुका है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि लोकनायक अस्पताल (LNJP) में मौजूद 74 वेंटिलेटरों में से 69 पूरी तरह से कार्यशील हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि ट्रॉमा सेंटर में सभी छह वेंटिलेटर चालू हैं और अतिरिक्त 18 बैकअप वेंटिलेटर भी उपलब्ध हैं। जिन दो से चार वेंटिलेटरों में अस्थायी रूप से खराबी आई है, उनकी मरम्मत जल्द ही कर ली जाएगी। मंत्री ने यह भी दावा किया कि बीजेपी सरकार के सत्ता में आने के बाद से दिल्ली के स्वास्थ्य क्षेत्र में महत्वपूर्ण सुधार हुए हैं।
आरटीआई रिपोर्ट में सामने आए आंकड़ों का विश्लेषण
इंडिया टुडे की आरटीआई रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली के 297 वेंटिलेटरों में से लगभग 31 प्रतिशत यानी 92 वेंटिलेटर खराब या नॉन-फंक्शनल हैं। खासतौर पर लोकनायक अस्पताल में 70 से अधिक वेंटिलेटर पूरी तरह से काम नहीं कर रहे हैं। इसके अलावा, प्रधानमंत्री केयर्स योजना के तहत प्रदान किए गए करीब 41 वेंटिलेटर भी ऑपरेशनल स्थिति में नहीं हैं।
यह आंकड़ा स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर कमियों को उजागर करता है, जो राजधानी के अस्पतालों की तैयारियों और संसाधनों की स्थिति पर सवाल खड़े करता है। इन आंकड़ों के आधार पर यह माना जा सकता है कि आवश्यक उपकरणों का रखरखाव और नियमित निरीक्षण जरूरी है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और विवादित बयान
आम आदमी पार्टी (AAP) ने इस स्थिति के लिए बीजेपी सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। पार्टी का आरोप है कि सरकार ने अस्पतालों में वेंटिलेटर की खराब स्थिति को नजरअंदाज किया है। वहीं, दिल्ली सरकार ने इस रिपोर्ट को विवादित करार देते हुए कहा है कि सभी रिकॉर्ड सही हैं, लेकिन कागजी कार्रवाई में कुछ विसंगतियां हो सकती हैं।
मंत्री ने यह भी आमंत्रित किया है कि इंडिया टुडे के पत्रकार अस्पताल का दौरा करें और जमीनी हकीकत का निरीक्षण करें। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि अस्पतालों में वेंटिलेटर की स्थिति कितनी गंभीर या सामान्य है।









