दिल्ली में CJP मार्च के दौरान हिंसा की जांच तेज
दिल्ली में ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान हुई हिंसा के बाद पुलिस ने अपनी जांच को व्यापक रूप से बढ़ा दिया है। अब पुलिस न केवल हिंसा में शामिल व्यक्तियों की पहचान कर रही है, बल्कि इस घटना के पीछे किसी बड़ी साजिश और पाकिस्तान (Pakistan) से जुड़े सोशल मीडिया हैंडल की भूमिका का भी पता लगाने में लगी है। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि हिरासत में लिए गए सभी लोग छात्र नहीं हैं। कुछ ऐसे भी हैं, जिनकी पहचान छात्र के रूप में नहीं हो पाई है। पुलिस अब यह समझने का प्रयास कर रही है कि इन व्यक्तियों की भूमिका क्या थी और क्या यह हिंसा पूर्व नियोजित थी।
सोशल मीडिया पर फैलाए गए भ्रामक दावों की पड़ताल जारी
पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस मामले की जांच का मुख्य हिस्सा सोशल मीडिया पर केंद्रित है। कई संदिग्ध सोशल मीडिया हैंडल से प्रदर्शन और हिंसा से संबंधित भ्रामक जानकारियां और अफवाहें लगातार फैलाई जा रही थीं। जांच एजेंसियां इन सोशल मीडिया खातों की गहन पड़ताल कर रही हैं। इनमें पाकिस्तान से संचालित बताए जा रहे कुछ हैंडल भी शामिल हैं, जिन्होंने हिंसा से जुड़ी कई पोस्ट और ट्वीट किए हैं।
सत्यता की जांच और कानूनी कार्रवाई की दिशा में कदम
जांच के दौरान पुलिस उन पोस्ट पर भी नजर रख रही है, जिनमें दावा किया गया कि हिंसा में सात प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई, 391 लोग घायल हुए और 250 लोगों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस इन दावों की सच्चाई, इनके स्रोत और इन्हें फैलाने वालों की भूमिका का विश्लेषण कर रही है। साथ ही, जनता से अपील की गई है कि वे किसी भी अनाधिकारिक जानकारी पर भरोसा न करें और उसे आगे साझा न करें। पुलिस का कहना है कि यदि जांच में किसी राजनीतिक दल, संगठन या अन्य समूह की भूमिका सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। विभिन्न स्थानों से मिली शिकायतों के आधार पर अलग-अलग एफआईआर दर्ज की जा रही हैं, और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।










