कूनो नेशनल पार्क में चीता पुनर्वास का अद्भुत प्रयास
मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित कूनो नेशनल पार्क में चल रहे प्रोजेक्ट चीता की चर्चा अक्सर इन तेज़ रफ्तार वन्यजीवों और उनकी सफल वापसी के प्रयासों पर केंद्रित रहती है। लेकिन इस सफलता के पीछे दिन-रात मेहनत कर रहे वन अधिकारियों, पशु चिकित्सकों, ट्रैकर्स और फ्रंटलाइन कर्मचारियों की टीम का योगदान अक्सर नजरअंदाज हो जाता है। हाल ही में कूनो नेशनल पार्क प्रबंधन ने अपने न्यूजलेटर के माध्यम से इस अनदेखी दुनिया की झलक प्रस्तुत की है।
चीता संरक्षण में टीमवर्क और निरंतर निगरानी का महत्व
मौजूदा समय में कूनो और उसके आसपास कुल 49 चीते का प्रबंधन किया जा रहा है। इनमें से 30 चीते गले में सैटेलाइट कॉलर लगाए गए हैं, जिनकी लगातार निगरानी की जाती है। वहीं 20 चीते मध्यप्रदेश और राजस्थान के 12 जिलों के खुले जंगलों में विचरण कर रहे हैं, जबकि बाकी को बड़े बाड़ों में रखा गया है। इन सभी प्रयासों के बावजूद, तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से अधिक होने और मानसून के दौरान उफनती नदियों के बावजूद निगरानी का कार्य निर्बाध रूप से जारी रहता है।
मौसम की परवाह किए बिना निरंतर निगरानी और देखभाल
कूनो की फील्ड टीमें हर दिन जंगल, पहाड़, नदी किनारे और कृषि क्षेत्रों में चीते की लोकेशन ट्रैक करती हैं। टीम के सदस्य घंटों वाहन चलाते हैं या मीलों पैदल चलकर हर चीते तक पहुंचते हैं, ताकि उनकी गतिविधियों और स्वास्थ्य पर नजर रखी जा सके। पशु चिकित्सकों की भूमिका केवल इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें स्वास्थ्य परीक्षण, रेस्क्यू ऑपरेशन, बेहोश करने की प्रक्रिया और मादा चीते व शावकों की विशेष देखभाल भी शामिल है। भारी बारिश और कठिन मौसम में भी ये टीमें अपने मिशन में जुटी रहती हैं।











