मध्य प्रदेश में संविदा डॉक्टर की अनियमितताएं उजागर
मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में एक चौंकाने वाला मामला प्रकाश में आया है, जिसमें शहडोल जिले के एक संविदा डॉक्टर को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया है। इस डॉक्टर पर आरोप है कि वह एक ही समय में तीन अलग-अलग जिलों-शहडोल, खरगोन और श्योपुर-में पदस्थ था। इस खुलासे ने स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा दिया है, क्योंकि सवाल उठ रहे हैं कि जब डॉक्टर तीन जिलों में कार्यरत था, तो वेतन का भुगतान किस आधार पर किया जा रहा था और सिस्टम को इसकी जानकारी क्यों नहीं मिली।
जांच के आदेश और प्रशासनिक लापरवाही
13 जुलाई को रीवा लोकायुक्त की टीम ने शहडोल के ऊफरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात संविदा मेडिकल ऑफिसर डॉ. महेश चंद शर्मा को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया। इस कार्रवाई के बाद पता चला कि डॉ. शर्मा का नाम केवल शहडोल में ही नहीं, बल्कि खरगोन और श्योपुर जिलों में भी संविदा मेडिकल ऑफिसर के रूप में दर्ज है। दस्तावेजों के अनुसार, वह फरवरी 2023 से खरगोन जिले के सेगांव विकासखंड के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भी कार्यरत था। यह स्थिति सवाल खड़ा करती है कि एक ही डॉक्टर तीन जिलों में कैसे सेवाएं दे रहा था और उसकी उपस्थिति तथा वेतन का सत्यापन किस स्तर पर किया गया।
जांच और जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया
खरगोन के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने सेगांव बीएमओ को तुरंत ही डॉक्टर की नियुक्ति, उपस्थिति रजिस्टर, वेतन भुगतान, अवकाश रिकॉर्ड, कार्यभार और अन्य सेवा अभिलेखों की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। साथ ही, उन्होंने स्वीकार किया कि मीडिया रिपोर्टों के माध्यम से ही उन्हें इस मामले की जानकारी मिली है। यदि वेतन जारी हुआ है, तो यह लापरवाही का संकेत है, जिसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए। पूरे प्रकरण की जानकारी राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के प्रबंध संचालक को भी भेजी जाएगी।
यह मामला न केवल प्रशासनिक चूक को दर्शाता है, बल्कि निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है। जांच से स्पष्ट होगा कि नियुक्ति, उपस्थिति और वेतन भुगतान में कहां-कहां अनियमितताएं हुई हैं और इनकी जिम्मेदारी किसकी है।











