करवा चौथ का त्योहार और उसकी धार्मिक महत्ता
करवा चौथ हिंदू धर्म में एक विशेष पर्व है, जो मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए मनाया जाता है। इस त्योहार का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि माना जाता है कि इस व्रत को रखने से पति की आयु लंबी होती है और दांपत्य जीवन में खुशहाली आती है।
इस पर्व का मुख्य आकर्षण चंद्रमा को अर्घ्य देना है, जिसे बिना पूरा किए व्रत अधूरा माना जाता है। इसलिए, इस दिन विधि-विधान से चंद्रमा को अर्घ्य देना अत्यंत आवश्यक है। अर्घ्य देते समय मंत्रों, शुभ शब्दों और मनोकामनाओं का उच्चारण किया जाता है, जिससे माता करवा का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
चंद्रमा को अर्घ्य देने के सही तरीके और मंत्र
करवा चौथ के दिन चंद्रमा को अर्घ्य देते समय विशेष मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है। सबसे प्रसिद्ध मंत्र है, “ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः”। इसके साथ ही, चंद्रमा की स्तुति के लिए “ऊँ दधि-शंख-तुषाराभं क्षीरोदार्णव-सम्भवम्। नमामि शशिनं सोमं शंभोर्मुकुट-भूषणम्॥” जैसी स्तुतियों का पाठ किया जाता है।
अर्घ्य देते समय पति का नाम लेकर माता करवा से प्रार्थना करनी चाहिए कि पति की आयु लंबी हो, साथ ही दांपत्य जीवन में स्थिरता और सभी रोग-दुख दूर हों। इस दिन चंद्रमा को अर्घ्य देने का उद्देश्य मन को शांति, नकारात्मक ऊर्जा का निष्कासन और सकारात्मकता का संचार है।
चंद्रमा को अर्घ्य देने का विधि और समय
शाम के समय माता करवा की पूजा पूरी करने के बाद व्रत कथा का पाठ करें। पूजा समाप्त होने के बाद घर की छत या आंगन में पूजा की थाली लेकर आएं, जिसमें जल से भरा लोटा, करवा, छलनी, अक्षत, मिठाई, फूल, दीपक और बाती हो।
चंद्रमा निकलने के बाद सबसे पहले उसकी आरती करें। फिर, छलनी में जलता हुआ दीपक रखकर चंद्र दर्शन करें। मंत्रों का जाप करते हुए मन ही मन पति की लंबी उम्र की कामना करें। इसके बाद चंद्रमा को जल अर्पित करें, जिसमें चांदी का सिक्का और अक्षत डालें। अंत में, उसी छलनी से पति का चेहरा देखें और पति के हाथों से जल ग्रहण कर व्रत का पारण करें।











