दिल्ली पुलिस की महिला कॉन्स्टेबल पर झूठे आरोप लगाने का मामला समाप्त
दिल्ली पुलिस की एक महिला कॉन्स्टेबल पर अपने साथी पुलिसकर्मी पर रेप का आरोप लगाने और वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने का आरोप था। हालांकि, अब जब यह आरोप झूठे साबित हुए हैं, साकेत कोर्ट ने उसके खिलाफ मुकदमा चलाने का आदेश दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि महिला ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अपने मित्र को फंसाने के लिए झूठी शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद संबंधित विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
कोर्ट ने किया आरोपों की जांच का निष्कर्ष, दोषी पाए जाने पर कार्रवाई तय
जांच के दौरान और सबूतों के आधार पर कोर्ट ने पाया कि महिला द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह से मनगढ़ंत और दुर्भावनापूर्ण थे। साकेत कोर्ट के समक्ष महिला कॉन्स्टेबल ने भी स्वीकार किया कि उसके लगाए गए आरोप झूठे थे। उसने यह भी माना कि संबंध और वीडियो सहमति से बनाए गए थे। इन तथ्यों के आधार पर कोर्ट ने महिला के खिलाफ मुकदमा चलाने का आदेश दिया है, जिससे उसकी साख और विभागीय जिम्मेदारी पर सवाल उठे हैं।
संबंधित खबरें और विभागीय कार्रवाई का प्रावधान
ऐसे मामलों में जहां झूठी शिकायतें और गंभीर दुराचार के आरोप सामने आते हैं, दिल्ली पुलिस के नियमों के तहत दोषी व्यक्ति को विभागीय जांच का सामना करना पड़ता है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो सेवा से निलंबन से लेकर बर्खास्तगी तक की कार्रवाई की जा सकती है। विभागीय प्रक्रिया के तहत ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। इससे पहले भी दिल्ली हाईकोर्ट ने ऐसे ही एक मामले में महिला कॉन्स्टेबल और उसके वकील साथी को दोषी ठहराते हुए उनके खिलाफ मुकदमा चलाने का आदेश दिया था। कोर्ट ने माना कि दोनों ने मिलकर एक व्यक्ति को झूठे आरोप में फंसाया था, और इस तरह के अपराधों पर सख्त कार्रवाई जरूरी है।










