मध्य प्रदेश ने GI टैग में नई उपलब्धि हासिल की
मध्य प्रदेश ने जीआई (Geographical Indication) टैग के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर स्थापित किया है। पहली बार देश के किसी राज्य ने अपनी 12 प्रमुख कृषि और बागवानी फसलों को एक साथ जीआई टैग दिलवाया है। इस सफलता से प्रदेश के किसानों, स्थानीय उत्पादकों और ब्रांडिंग को मजबूती मिलने की उम्मीद जगी है। यह उपलब्धि प्रदेश की कृषि विविधता और गुणवत्ता का प्रमाण है, जो न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी पहचान बनाएगा।
प्रमुख जीआई टैग प्राप्त फसलें और उनकी विशेषताएँ
इस सूची में गुना का विशिष्ट धनिया, नरसिंहपुर के बरमान घाट का बैंगन (भटे), बैतूल का प्रसिद्ध गजरिया आम, खरगौन की लाल मिर्च, मांडू की खुरासानी इमली, जबलपुर का स्वादिष्ट मटर, सिवनी का बड़ा सीताफल, मालवी आलू और गराड़ू, नरसिंहपुर का उच्च गुणवत्ता वाला गुड़, जबलपुर का सिंघाड़ा, आलीराजपुर का नूरजहां आम, बुरहानपुर का केला, इंदौरी जीरावन, रतलाम सैलाना की बालम ककड़ी और छतरपुर का पारंपरिक पान शामिल हैं। इन फसलों को जीआई टैग मिलने से इनकी गुणवत्ता और ब्रांड वैल्यू में वृद्धि होगी, जिससे किसानों को बेहतर बाजार मूल्य प्राप्त होगा।
आगे की योजना और प्रस्तावित उत्पादों का विस्तार
इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार ने उज्जैन की इमली, आलीराजपुर का अचारी आम, मालवा का सफेद प्याज, झाबुआ का दाल-पानिया, मंदसौर का देसी जीरा, बुरहानपुर की जलेबी और अशोकनगर की खिरनी जैसे पारंपरिक उत्पादों को भी जीआई टैग दिलवाने का प्रस्ताव भेजा है। इन उत्पादों की विशिष्टता और स्थानीय परंपराओं को संरक्षित करने के लिए यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे न केवल इन उत्पादों की पहचान मजबूत होगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बल मिलेगा।











