भोपाल के ट्विशा केस में आरोपी सास और पति की न्यायिक हिरासत बढ़ी
भोपाल में चर्चित ट्विशा शर्मा हत्याकांड के मुख्य आरोपियों सास गिरिबाला सिंह और पति समर्थ सिंह की न्यायिक हिरासत को अदालत ने 14 दिनों के लिए और बढ़ाने का आदेश दिया है। दोनों आरोपियों को सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से अदालत में पेश किया गया, जहां सुनवाई के दौरान सीबीआई ने उनकी हिरासत अवधि बढ़ाने की मांग की।
सीबीआई ने अदालत को सूचित किया कि मामले की जांच अभी भी जारी है और आरोपियों का रिमांड आवश्यक है ताकि मामले के विभिन्न पहलुओं की गहराई से जांच की जा सके। इस आधार पर अदालत ने दोनों आरोपियों की न्यायिक हिरासत को 13 जुलाई तक के लिए बढ़ाने का फैसला सुनाया। इस हाई-प्रोफाइल केस की जांच सीबीआई कर रही है, जो मामले के हर पहलू की बारीकी से पड़ताल में लगी है।
ट्विशा केस की जांच में नई जानकारियां और आगे की कार्रवाई
मामले की अगली सुनवाई और जांच की प्रगति पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। पुलिस और जांच एजेंसियां इस जटिल मामले की तह तक पहुंचने के लिए प्रयासरत हैं। उल्लेखनीय है कि यह केस दहेज प्रताड़ना, संदिग्ध मौत और रसूखदार आरोपियों के कारण राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहा है।
मामले की जड़ें नवंबर 2025 में हुई ट्विशा शर्मा की शादी से जुड़ी हैं, जो पूर्व मिस पुणे और मॉडल-एक्ट्रेस थीं। शादी के छह महीने बाद मई 2026 में, उन्हें संदिग्ध परिस्थितियों में अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। शुरुआती पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत का कारण फांसी लगना बताया गया था।
मामले की पृष्ठभूमि और जांच की जटिलताएं
परिवार का आरोप है कि ट्विशा को शादी के बाद से ही दहेज के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। उनके भाई मेजर हर्षित शर्मा ने आरोप लगाया कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में चोटों के निशान छुपाए गए और पुलिस ने रसूख के कारण जांच में ढील दी।
वहीं, सास गिरिबाला सिंह ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि ट्विशा मानसिक बीमारी और ड्रग्स की लत से जूझ रही थीं, जिसे परिवार ने खारिज किया। पुलिस की जांच में कई लापरवाहियों का भी खुलासा हुआ, जैसे कि फांसी लगाने वाली बेल्ट का सही समय पर जब्ती न होना और गवाहों के दस्तखत न होना। इस पूरे प्रकरण ने राष्ट्रीय स्तर पर न्यायिक और पुलिस व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।











