विदिशा में NEET री-एग्जाम के दौरान पिता की बेबसी और छात्रा का सपना टूटना
मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में NEET री-एग्जाम के समय एक ऐसी घटना सामने आई जिसने वहां मौजूद हर किसी का दिल दहलाया। एक पिता अपनी बेटी का भविष्य सुरक्षित करने के लिए परीक्षा केंद्र के बाहर रोते-गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन सख्त परीक्षा नियमों के कारण उनकी बेटी को परीक्षा में प्रवेश नहीं मिल पाया। यह घटना सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है, और लोग इस पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
दूर से आई छात्रा की परीक्षा में भाग न ले पाने की कहानी
जानकारी के अनुसार, कुरवाई तहसील के ग्राम कुल्हा की रहने वाली रागनी विश्वकर्मा अपने पिता उमेश विश्वकर्मा के साथ नीट री-एग्जाम देने विदिशा पहुंची थी। दोनों करीब 70 किलोमीटर की दूरी तय कर परीक्षा केंद्र पहुंचे थे। परिवार का कहना है कि रास्ते में तेज बारिश होने और बाइक पंचर होने के कारण वे समय पर नहीं पहुंच सके। जब वे परीक्षा केंद्र पहुंचे, तो निर्धारित समय समाप्त हो चुका था और गेट बंद हो चुका था। बताया जा रहा है कि वे केवल दो मिनट की देरी से पहुंचे थे।
पिता की निराशा और परीक्षा नियमों का कड़ा पालन
परीक्षा केंद्र के बाहर का दृश्य अत्यंत भावुक था। छात्रा और उसके पिता दोनों ही फफक कर रो पड़े। पिता उमेश विश्वकर्मा बार-बार अधिकारियों से बेटी को परीक्षा देने की अनुमति देने का अनुरोध कर रहे थे। उन्होंने बताया कि बेटी ने पूरे साल मेहनत कर नीट की तैयारी की थी और डॉक्टर बनने का सपना देखा था। लेकिन कुछ मिनट की देरी ने उसकी सारी मेहनत पर पानी फेर दिया।
वहीं, परीक्षा अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (USGS) द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार, निर्धारित समय के बाद किसी भी परीक्षार्थी को प्रवेश नहीं दिया जा सकता। सुरक्षा, गोपनीयता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह नियम जरूरी है। इसलिए, समय सीमा समाप्त होने के बाद किसी भी छात्र को अंदर जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
यह घटना अब पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन चुकी है। एक ओर परीक्षा व्यवस्था के सख्त नियम हैं, तो दूसरी ओर एक छात्रा और उसके परिवार की मेहनत, उम्मीदें और भावनाएं हैं, जो कुछ मिनट की देरी के कारण वंचित रह गईं। सोशल मीडिया पर लोग इस घटना को लेकर अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं, जिसमें कुछ लोग पिता और बेटी के प्रति सहानुभूति जता रहे हैं, तो कुछ नियमों का समर्थन कर रहे हैं।











