मध्य प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण के नए कदम और पहल
मध्य प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण को मजबूत बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने वन विभाग की समीक्षा बैठक में आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) को बाघ और भारतीय गौर (Indian Bison) देने का प्रस्ताव रखा है, साथ ही इसके बदले में वहां से जंगली कुत्ते या अन्य दुर्लभ वन्यजीव प्रजातियों को लाने का निर्देश भी दिया है। इस कदम का उद्देश्य प्रदेश में वन्यजीवों की सुरक्षा और संरक्षण को और अधिक प्रभावी बनाना है।
राजस्थान से सोन चिरैया और वन्यजीवों का आदान-प्रदान
बैठक के दौरान, मुख्यमंत्री ने बताया कि आंध्र प्रदेश ने मध्य प्रदेश से बाघ और गौर प्राप्त करने का अनुरोध किया है। इस प्रक्रिया में, वैधानिक कदम उठाकर इन प्राणियों को मध्य प्रदेश में स्थानांतरित किया जाएगा। इसके बदले में, वहां से जंगली कुत्ते या अन्य दुर्लभ वन्यजीव प्रजातियों को लाने का प्रयास किया जाएगा।
सोन चिरैया का संरक्षण और जंगलों में पुनः स्थापना
इसके अतिरिक्त, राजस्थान सरकार द्वारा लुप्तप्राय सोन चिरैया (Great Indian Bustard) को मध्य प्रदेश में स्थानांतरित करने पर सहमति बन गई है। इन पक्षियों को ग्वालियर के घाटीगांव और मंदसौर के गांधी सागर के जंगलों में छोड़ा जाएगा, जहां उनका प्राकृतिक वातावरण अनुकूल है। यह कदम वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है, जो इन दुर्लभ पक्षियों के संरक्षण में मदद करेगा।










