मध्य प्रदेश में केसर आम की खेती का विस्तार
विजय पाल सिंह पटेल ने अपने बगीचे में केसर आम की खेती पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है। आमतौर पर मध्य प्रदेश में इस प्रजाति की खेती कम देखने को मिलती है, लेकिन यहां लगभग छह हजार जम्बो केसर आम के पौधे लगाए गए हैं। यह खास प्रजाति का आम एक से डेढ़ किलो तक का वजन कर सकता है, जो इसे बाजार में अलग पहचान दिलाता है।
दो साल पहले इस बगीचे से तैयार आमों का निर्यात दुबई (Dubai) और लंदन (London) तक किया गया है। इससे स्पष्ट होता है कि यहां की फसलें केवल स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी जगह बना रही हैं। उत्पादन के साथ-साथ गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। आम के फलों को सुरक्षित रखने के लिए बैगिंग तकनीक का प्रयोग किया जाता है, जिससे फलों का रंग और चमक बेहतर बनी रहती है।
उच्च गुणवत्ता और सुरक्षित फसल के लिए आधुनिक तकनीक का प्रयोग
बैगिंग तकनीक की मदद से फलों को कीटों से सुरक्षा मिलती है और दवाओं का प्रभाव सीधे फल पर नहीं पड़ता। इससे आम अधिक सुरक्षित और बाजार के लिए उपयुक्त बनते हैं। विजय पाल सिंह पटेल की यह पहल अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही है। पारंपरिक खेती से हटकर तकनीक आधारित बागवानी ने न केवल उत्पादन में वृद्धि की है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी पहचान बनाई है।
नरसिंहपुर (Narsinghpur) का यह आम बाग अब इस बात का उदाहरण बन गया है कि सही तकनीक और सोच के साथ खेती को वैश्विक स्तर तक पहुंचाया जा सकता है। यह सफलता साबित करती है कि आधुनिक खेती में नवाचार और तकनीक का समावेश कितना महत्वपूर्ण है।
आधुनिक खेती से बढ़ी आम की गुणवत्ता और बाजार पहुंच
70 एकड़ की कम उपजाऊ जमीन पर खड़ा यह आधुनिक आम बाग तकनीक और मेहनत का परिणाम है। बैगिंग तकनीक से फलों को कीटों से सुरक्षा मिलती है और उनकी गुणवत्ता बनी रहती है। इस तरह की तकनीक से न केवल फसल की सुरक्षा होती है, बल्कि बाजार में भी इसकी मांग बढ़ रही है। यह उदाहरण दर्शाता है कि सही तकनीक और समर्पण से खेती को नई ऊंचाइयों पर ले जाया जा सकता है।










