दिल्ली के मालवीय नगर में आग हादसे के बाद MCD की कड़ी कार्रवाई
दिल्ली के मालवीय नगर स्थित फ्लोरिश-इन होटल में भीषण आग लगने के कारण 23 लोगों की मौत के मामले में दिल्ली नगर निगम (MCD) ने सख्त कदम उठाए हैं। निगम ने संविदा पर कार्यरत सहायक जन स्वास्थ्य निरीक्षक प्रिंस मान की सेवाएं तुरंत प्रभाव से समाप्त कर दी हैं। यह कदम उस समय लिया गया है जब पता चला है कि उन्होंने आग से जुड़ी जांच में गंभीर लापरवाही बरती और झूठी रिपोर्ट दी।
होटल लाइसेंस प्रक्रिया में हुई लापरवाही का खुलासा
मालूम हो कि किसी भी होटल या दुकान को संचालन के लिए MCD से हेल्थ लाइसेंस लेना अनिवार्य है। इस होटल ने भी ऐसा लाइसेंस प्राप्त करने के लिए आवेदन किया था, जो 17 मार्च को प्रिंस मान को मिला था। प्रिंस मान एमसीडी के साउथ जोन में “सहायक जन स्वास्थ्य निरीक्षक” (APHI) के पद पर ठेके पर कार्यरत थे, यानी वे स्थायी सरकारी कर्मचारी नहीं बल्कि अनुबंधित कर्मचारी थे।
17 मार्च को प्राप्त फाइल के बाद प्रिंस मान ने पूरे 78 दिनों तक कोई कार्रवाई नहीं की। उनके पास फाइल तो थी, लेकिन उन्होंने इसे बिना किसी कारण के लंबित रखा। नियमों के अनुसार, इस प्रक्रिया को जल्द पूरा करना चाहिए था, लेकिन उन्होंने इसे अनदेखा कर दिया।
2 जून को, यानी आग लगने से एक रात पहले, उन्होंने स्थल का निरीक्षण किया। लेकिन यह निरीक्षण महज औपचारिकता था। जांच में पता चला कि उन्होंने जमीन पर मौजूद खामियों और जमा किए गए कागजात में अंतर को जानबूझकर नजरअंदाज किया। होटल में मौजूद गड़बड़ियों के बावजूद, उन्होंने अपनी रिपोर्ट में सब कुछ सही दिखाने का प्रयास किया। इस झूठी रिपोर्ट के आधार पर 2 जून को लाइसेंस मंजूर कर दिया गया, जबकि अगले ही दिन आग लग गई और 23 लोगों की जान चली गई।
मामले में हुई कार्रवाई और जिम्मेदारी तय
जांच के बाद एमसीडी के जन स्वास्थ्य विभाग ने एक आधिकारिक आदेश जारी किया। इसमें कहा गया कि प्रिंस मान ने 78 दिनों तक फाइल को बिना किसी उचित कारण के लटकाए रखा। जांच में पाया गया कि उन्होंने जांच प्रक्रिया को अधूरी और ऊपरी स्तर पर ही पूरा किया। कागजात में खामियां थीं और जमीन पर हालात अलग थे, फिर भी उन्होंने झूठी रिपोर्ट दी। इस रिपोर्ट के आधार पर लाइसेंस जारी किया गया, जो कि पूरी तरह से अनुचित था।
एमसीडी ने स्पष्ट किया कि प्रिंस मान का यह रवैया ‘पूरी तरह से बेईमानी और लापरवाही’ का परिचायक है। यह भी कहा गया कि ऐसे व्यक्ति को जिम्मेदारी वाले पद पर रखना उचित नहीं है। इसलिए, सहायक आयुक्त (जन स्वास्थ्य) के अधिकारों का प्रयोग करते हुए, प्रिंस मान की कांट्रेक्चुअल नौकरी तुरंत प्रभाव से समाप्त कर दी गई है।
यह आदेश उपायुक्त (दक्षिण क्षेत्र), जिला स्वास्थ्य अधिकारी (दक्षिण क्षेत्र) और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को भेजा गया है ताकि तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
यह मामला एक बड़ा सवाल खड़ा करता है कि यदि प्रिंस मान ने सही जांच की होती और खामियों को रिपोर्ट में दर्शाया होता, तो संभवतः लाइसेंस नहीं मिलता और होटल बंद हो जाता। इससे 23 जानें बच सकती थीं। 78 दिनों की लापरवाही और झूठी रिपोर्ट ने इस त्रासदी को जन्म दिया, जो पूरे शहर के लिए एक चेतावनी है।











