हौज रानी में भीषण आग: प्रशासनिक लापरवाही और अवैध गतिविधियों का खुलासा
दिल्ली के मालवीय नगर स्थित हौज रानी क्षेत्र में हुई भीषण आग ने 21 लोगों की जान ले ली है, जिसके बाद प्रशासनिक मशीनरी सक्रिय हो गई है। हालांकि, आजतक की विशेष जांच रिपोर्ट में जो तथ्य सामने आए हैं, वे कई गंभीर सवाल खड़े करते हैं। इस घटना के पीछे नियमों का उल्लंघन और अवैध निर्माण की जटिल जालसाजी का भी पर्दाफाश हुआ है।
अवैध निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों का बढ़ता जाल
आरोप है कि जिन प्रॉपर्टीज को कभी दिल्ली सरकार की ‘बेड एंड ब्रेकफास्ट’ योजना के तहत अनुमति मिली थी, वे धीरे-धीरे व्यावसायिक गेस्ट हाउस और मिनी होटलों में परिवर्तित हो गईं। ये स्थान विदेशी मरीजों और उनके परिजनों के ठहरने के बड़े केंद्र बन चुके हैं। साथ ही, इलाके में कई रिहायशी मकान भी कथित तौर पर व्यावसायिक उपयोग में लाए जा रहे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह सब उस समय हो रहा था जब आग लगने के तुरंत बाद पुलिस ने कई प्रॉपर्टीज को खाली कराना शुरू कर दिया था।
बिना पहचान और नियमों के उल्लंघन पर खुलासे
जब हमारी टीम हौज रानी के एक गेस्ट हाउस में कमरे लेने पहुंची, तो स्टाफ ने साफ कहा कि पूरे इलाके में कोई भी कमरा खाली नहीं है। लेकिन कुछ ही मिनटों में तस्वीर बदल गई। पुलिस कार्रवाई के बीच ही ब्रोकर सक्रिय थे और अवैध रूप से कमरे दिला रहे थे। एक ब्रोकर ने हमें कुतुबुद्दीन चौधरी के यहां ले जाकर बताया कि यहां पर कमरों की संख्या बढ़ रही है और किराया भी तय है। कमरे का किराया 1500 रुपये प्रतिदिन था, जिसमें बिजली अलग से वसूली जा रही थी।
इसके बाद, एक अन्य ब्रोकर ने तीसरी मंजिल पर दो कमरों का फ्लैट दिखाया, जिनका किराया 3300 रुपये प्रतिदिन था। भुगतान पेटीएम से किया जा रहा था, और दलाली की भी बात सामने आई। यह सब उस समय हो रहा था जब आग की घटना के बाद भी बुकिंग का सिलसिला जारी था।
इलाके की संकरी गलियों, बिजली के तारों के जाल और अतिक्रमण की स्थिति भी चिंता का विषय है। कई जगहों पर न तो पहचान पत्र मांगे गए और न ही पुलिस वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी की गई। यहां तक कि विदेशी मरीजों और उनके परिजनों के लिए जरूरी नियमों का भी उल्लंघन हो रहा था।
इस जांच में स्पष्ट हुआ कि न तो कोई रिकॉर्ड रखा गया और न ही कोई वेरिफिकेशन किया गया। जबकि दिल्ली पुलिस के नियमों के अनुसार होटल और रिहायशी मकानों में आने वाले मेहमानों का रिकॉर्ड रखना अनिवार्य है। विदेशी नागरिकों के मामले में सी-फॉर्म भरना और संबंधित एजेंसियों को जानकारी देना जरूरी है। लेकिन, आजतक की पड़ताल में ऐसा कोई रिकॉर्ड या प्रक्रिया नजर नहीं आई।
यह सब दर्शाता है कि नियमों का उल्लंघन और निगरानी की कमी ने इस त्रासदी को जन्म दिया है। सवाल यह है कि इन अवैध गतिविधियों की जानकारी पहले क्यों नहीं मिली और कार्रवाई क्यों देर से हुई। हौज रानी की इस आग ने 21 जिंदगियों को छीन लिया, लेकिन यह घटना केवल एक हादसे का परिणाम नहीं, बल्कि नियमों की अनदेखी और प्रशासनिक लापरवाही का भी परिणाम है।









