मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव का राजनीतिक समीकरण
मध्य प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों में से दो पर भाजपा की जीत पहले से ही सुनिश्चित मानी जा रही है। पार्टी ने इन सीटों के लिए राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ और प्रदेश मंत्री रजनीश अग्रवाल को उम्मीदवार बनाया है। दूसरी ओर, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस चुनाव के लिए अपनी पूर्व लोकसभा सांसद मीनाक्षी नटराजन को प्रत्याशी घोषित किया है।
कांग्रेस में उथल-पुथल और भाजपा का रणनीतिक लाभ
मीनाक्षी नटराजन के नाम की घोषणा के बाद कांग्रेस के भीतर मतभेद उभर कर सामने आए हैं। पार्टी के कई नेता इस निर्णय से असंतुष्ट हैं, जिससे कांग्रेस के अंदर असमंजस की स्थिति बन गई है। वहीं, भाजपा इस असमंजस का फायदा उठाने की कोशिश कर रही है। संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा है कि यदि पार्टी तीसरे प्रत्याशी का नाम भी घोषित करती है, तो उसकी जीत सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।
मध्य प्रदेश विधानसभा का गणित और चुनावी रणनीति
मध्य प्रदेश की 230 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा का प्रभावशाली स्थिति है, जिसमें उसके पास 164 सीटें हैं। कांग्रेस के पास 64 सीटें हैं, जबकि भारत आदिवासी पार्टी के पास एक सीट है। जीत के लिए हर सीट पर 58 वोट जरूरी हैं। भाजपा के पास अभी भी 49 से अधिक अतिरिक्त वोट हैं, जिससे उसकी स्थिति मजबूत है। यदि पार्टी अंतिम समय में तीसरा उम्मीदवार उतारती है, तो उसे मुकाबला जीतने के लिए केवल 10 से 11 अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी, जो क्रॉस वोटिंग या अनुपस्थित वोटों से आसानी से जुटाए जा सकते हैं।
वहीं, कांग्रेस के पास जीत के लिए जरूरी 58 वोटों से महज सात वोट अधिक हैं। पार्टी के अंदरूनी मतभेद और विधायकों की सदस्यता पर चल रही कानूनी कार्यवाही के कारण कांग्रेस का भरोसा कमजोर हो रहा है। यदि कुछ विधायकों ने पाला बदला या क्रॉस वोटिंग की, तो कांग्रेस की जीत खतरे में पड़ सकती है। इस स्थिति को देखते हुए, भाजपा ने तीसरे प्रत्याशी की संभावना को लेकर अपनी रणनीति मजबूत कर ली है।











