कूनो नेशनल पार्क में पानी की समस्या का समाधान
कूनो नेशनल पार्क में पानी की गंभीर कमी से जूझ रहे जंगलों में अब नई जान आ गई है। चीता प्रोजेक्ट के प्रभाव से इस पार्क ने न केवल लुप्तप्राय वन्यजीवों को फिर से अपने आवास में स्थान दिया है, बल्कि स्थानीय समुदायों के जीवन में भी रोजगार के नए अवसर पैदा किए हैं। इस बदलाव ने क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता को पुनः जीवंत कर दिया है।
मॉडर्न तकनीक से जल संरक्षण का सफल प्रयास
पार्क के उन इलाकों में जहां पहले पानी की कमी के कारण जानवर गर्मियों में पलायन कर जाते थे, अब जल प्रबंधन के बेहतरीन उपाय अपनाए गए हैं। कूनो नदी का पानी अब आधुनिक सोलर पंप तकनीक के माध्यम से इन इलाकों तक पहुंच रहा है। दो साल पहले वेस्ट पालपुर रेंज में 22.5 हॉर्स पावर के सोलर सिस्टम से शुरुआत हुई, जिसमें लगभग 8 किलोमीटर दूर सूखे तालाबों में पानी पहुंचाया गया।
इस साल इस प्रयास को और विस्तार देते हुए ऑच्छापुरा रेंज में 42.5 हॉर्स पावर क्षमता वाले दूसरे सोलर पंप सिस्टम को सक्रिय किया गया है। यह प्रणाली कूनो नदी से पानी खींचकर लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित तीन तालाबों को भरने का काम कर रही है, जिससे गर्मियों में सूखने वाले जलाशयों में फिर से जीवन आ गया है।
प्राकृतिक आवास में नई जान और जैव विविधता का विस्तार
प्रोजेक्ट चीता के प्रभाव से अब कूनो में कई प्राचीन और विलुप्तप्राय प्रजातियों की उपस्थिति दर्ज की जा रही है। दशकों बाद जंगली उल्लू जैसे दुर्लभ पक्षी फिर से देखने को मिल रहे हैं, जो पहले कभी यहां नहीं पाए जाते थे। 113 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद इसकी मौजूदगी की पुष्टि हुई है, और दिसंबर 2025 से यह नियमित रूप से दिखाई दे रहा है।
इसके अलावा, कूनो में पहली बार जंगली कुत्ते (ढोल) और भेड़िए जैसे जानवर भी देखे गए हैं, जो पारिस्थितिकी तंत्र की स्वस्थता का संकेत हैं। अब यहां भेड़िए भी स्थायी रूप से रह रहे हैं, जो पहले गर्मियों में ही क्षेत्र छोड़ देते थे। इन बदलावों ने जंगल की सन्नाटे को तोड़कर जीवंतता ला दी है, जहां अब पक्षियों की चहचहाहट और वन्यजीवों की आवाजें गूंज रही हैं।
पिछले कुछ वर्षों में जंगल का दृश्य पूरी तरह बदल चुका है। सूखे इलाकों में पानी का स्रोत बढ़ने से जानवरों का जीवन आसान हो गया है। अब शाम होते ही जंगल में जानवर पानी पीने के लिए निकलते हैं, और जंगल की शांतिपूर्ण आवाजें फिर से लौट आई हैं।
स्थानीय अर्थव्यवस्था में भी इस बदलाव का सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। बढ़ते पर्यटन और निवेश से क्षेत्र के छोटे व्यवसाय फल-फूल रहे हैं। स्थानीय युवाओं को नेचर गाइड, सुरक्षा सेवाएं और टूरिज्म से जुड़ी नौकरियों में अवसर मिल रहे हैं, जिससे क्षेत्र में खुशहाली लौट आई है।










