दिल्ली जिमखाना क्लब से जुड़ी नौकरी और जमीन का विवाद
केंद्र सरकार ने दिल्ली जिमखाना क्लब को खाली करने का आदेश जारी किया है, जिससे लगभग 600 कर्मचारियों की नौकरी और भविष्य पर गंभीर संकट मंडरा रहा है। इस निर्णय के बाद कर्मचारी अपनी नौकरी और परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं, और वे उचित मुआवजे तथा नौकरी की सुरक्षा की मांग कर रहे हैं।
कर्मचारियों की चिंता और सरकार का आश्वासन
जिमखाना कर्मचारी कल्याण संघ के अध्यक्ष नंदन सिंह नेगी ने बताया कि क्लब के अध्यक्ष मलय सिन्हा और निदेशक कुलदीप चहल ने फोन पर आश्वासन दिया कि उनकी चिंताओं को लिखित में सरकार तक पहुंचाया गया है और इस पर बातचीत चल रही है। उन्होंने यह भी कहा कि कर्मचारियों के हितों का पूरा ध्यान रखा जा रहा है ताकि किसी को भी बुरा नतीजा भुगतना पड़े।
कर्मचारियों ने बताया कि अचानक ही उनके फोन बजने लगे और माहौल में दहशत फैल गई। उन्हें इस फैसले की जानकारी न्यूजपेपर और टीवी चैनलों से मिली। एक कर्मचारी ने कहा, “हमें औपचारिक रूप से कोई सूचना नहीं दी गई थी, लेकिन उस दिन अचानक सभी सदस्यों के फोन आने लगे। रात होते-होते, क्लब के बंद होने की खबर पर चर्चा करने के लिए और भी सदस्य क्लब में पहुंचने लगे।”
उन्होंने आगे कहा कि उन्हें इस बारे में केवल फोन कॉल, समाचार रिपोर्ट और बातचीत से पता चला है। इस खबर के बाद से ही कई कर्मचारी ठीक से सो नहीं पा रहे हैं, क्योंकि उन्हें अपने परिवार का पालन-पोषण भी करना है।
भविष्य और सुविधाओं का संकट, अदालत का रुख
कई कर्मचारियों का मानना है कि उनका जीवन इस क्लब से जुड़ा रहा है, और कई पीढ़ियों से यहां काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह रिश्ता इतना पुराना है कि इसे एक दिन में खत्म नहीं किया जा सकता। कर्मचारी इस लड़ाई को सिर्फ नौकरी की नहीं, बल्कि अपने परिवार के भविष्य की लड़ाई मानते हैं।
कुछ कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में क्लब की सुविधाएं कम हो गई हैं। उन्हें 2022 से महंगाई भत्ते का लाभ नहीं मिला, बोनस घटाए गए, ग्रेच्युटी में कटौती हुई और रिटायरमेंट की उम्र को 62 से घटाकर 60 साल कर दिया गया है।
अगले साल रिटायर होने वाले एक कर्मचारी ने बताया कि युवा कर्मचारी सबसे ज्यादा परेशान हैं, क्योंकि उन्हें अपने परिवार और भविष्य की चिंता सता रही है। क्लब के खेल ढांचे जैसे टेनिस ग्रास कोर्ट, हार्ड कोर्ट, स्विमिंग पूल और अन्य सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने पूछा कि यदि सरकार खेल ढांचे को बढ़ाना चाहती थी, तो पिछले पांच वर्षों में ऐसा क्यों नहीं किया गया।
कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उन्हें उचित मुआवजा या कोई योजना नहीं दी गई, तो वे अदालत का रुख कर सकते हैं। दिल्ली जिमखाना क्लब ने इस आदेश को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है, और सुनवाई के लिए कोर्ट ने आज (26 मई) सहमति दी है।
पिछले हफ्ते केंद्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय के तहत आने वाले लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस ने क्लब को 27.3 एकड़ जमीन 5 जून तक खाली करने का आदेश दिया था। सरकार का तर्क है कि इस जमीन का उपयोग जरूरी संस्थागत कार्य, प्रशासनिक ढांचे और रक्षा संबंधी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए किया जाएगा।
यह क्लब अपने इतिहास और विरासत के लिए जाना जाता है, जिसकी शुरुआत ब्रिटिश काल में 1913 में ‘इम्पीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब’ के रूप में हुई थी। आजादी के बाद इसका नाम बदलकर दिल्ली जिमखाना क्लब कर दिया गया। यह क्लब अपनी बेहतरीन खेल सुविधाओं और आलीशान परिसर के लिए प्रसिद्ध है।










