बिहार में जाति आधारित अपराध और राजनीति का नया रूप
बिहार में अब जाति के आधार पर अपराध और राजनीति का मेल देखने को मिल रहा है। पहले जहां गठबंधन की राजनीति और चुनावी जंग मुख्य मुद्दे थे, वहीं अब अपराध को जाति से जोड़कर देखा जा रहा है। विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया है कि राज्य में जाति के आधार पर एनकाउंटर किए जा रहे हैं।
जाति गणना और राजनीतिक विवाद
2022 में महागठबंधन की सरकार बनने के समय यह मुद्दा चर्चा में आया था, जब नीतीश कुमार ने जातिगत गणना कराई थी और विधानसभा में रिपोर्ट भी पेश की थी। हालांकि, यह मामला ज्यादा आगे नहीं बढ़ पाया। तेजस्वी यादव ने कुछ समय तक इस गणना का श्रेय लिया, लेकिन बाद में राहुल गांधी ने बिहार में हुई जातिगत गणना को झूठा करार दिया। 2023 के विधानसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने जाति जनगणना का मुद्दा जोरशोर से उठाया, जिसके बाद केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय जनगणना के साथ जातीय गणना कराने की घोषणा कर दी। इससे जाति आधारित समीकरण भी टूट गए।
बिहार में अपराध और जाति आधारित एनकाउंटर पर सरकार का रुख
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने तेजस्वी यादव के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि पुलिस को जाति पूछकर गोली चलानी चाहिए। उन्होंने कहा, “मैं तो पुलिस को कहूंगा कि जाति पूछकर ही गोली चलाओ।” यह बयान बिहार में अपराध और जाति राजनीति के गहरे संबंध को दर्शाता है। मुख्यमंत्री का मानना है कि बिहार में अपराधियों के खिलाफ योगी मॉडल लागू किया जा रहा है, जिसमें एनकाउंटर का तरीका अपनाया जा रहा है।
बिहार में पुलिस का दावा है कि कई अपराधियों को जख्मी हालत में गिरफ्तार किया गया है, जबकि कुछ को मारा भी गया है। तेजस्वी यादव का आरोप है कि जाति देखकर एनकाउंटर कराए जा रहे हैं। उन्होंने सवाल किया है कि बालिका गृह कांड के आरोपियों का एनकाउंटर क्यों नहीं हुआ और रेपिस्टों का एनकाउंटर कब किया जाएगा।
सम्राट चौधरी ने कहा है कि पुलिस को किसी भी अपराधी को सरेंडर करने का मौका देना चाहिए, नहीं तो उन्हें गोली मारने का अधिकार है। उन्होंने यह भी कहा कि अपराधियों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। बिहार में चल रहे ‘लंगड़ा एनकाउंटर’ का तरीका भी इसी नीति का हिस्सा है, जिसमें अपराधी न माने तो गोली मार दी जाती है।
अधिकारियों के अनुसार, 2025 के बाद से अब तक करीब दो दर्जन एनकाउंटर हो चुके हैं, जिनमें से छह अपराधी मारे गए हैं। इनमें यादव, कुशवाहा, भूमिहार, ब्राह्मण और माली जाति के अपराधी शामिल हैं। इन एनकाउंटरों में मारे गए अपराधियों के नाम हैं रामधनी यादव, सोनू यादव, प्रिंस कुशवाहा, कुंदन ठाकुर, प्रियांशु दुबे और दयानंद मालाकार।
बिहार में अपराधियों का यह तरीका जाति के आधार पर हो रहा है या नहीं, इस पर सवाल उठते रहे हैं। हालांकि, पुलिस का तर्क है कि अपराधी किसी भी जाति का हो, उसे कानून के तहत सजा मिलनी चाहिए। बिहार में अपराध और जाति राजनीति का यह नया रूप अभी भी चर्चा का विषय बना हुआ है।









