मध्य प्रदेश की कलेक्टर का सख्त और संवेदनशील रवैया
मध्य प्रदेश के मैहर जिले की कलेक्टर IAS बिदिशा मुखर्जी अपने कठोर और संवेदनशील दृष्टिकोण के कारण वर्तमान में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। हाल ही में जब उन्होंने मैहर के सिविल अस्पताल का आकस्मिक निरीक्षण किया, तो वहां का दृश्य देखकर वह खुद को नियंत्रित नहीं कर सकीं। उन्होंने अपने आप को एक ‘सुपर वुमेन’ की तरह समाज की परंपराओं और कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाते हुए देखा गया।
पांचवें बच्चे के जन्म पर कलेक्टर का सख्त संदेश
अस्पताल के मेटरनिटी वार्ड में निरीक्षण के दौरान जब उन्हें पता चला कि एक महिला ने अपने पांचवें बच्चे को जन्म दिया है, तो वह दंग रह गईं। उन्होंने उस महिला के पास जाकर प्रेमपूर्वक, लेकिन दृढ़ता से समझाया कि आज के महंगाई के दौर में इतने बच्चों का पालन-पोषण, अच्छी शिक्षा और स्वास्थ्य का ध्यान रखना कितना कठिन है। कलेक्टर ने सीधे सवाल किया कि इस बड़े परिवार का भविष्य कैसे सुरक्षित किया जाएगा।
उनके इस कड़े तेवर ने अस्पताल में मौजूद कर्मचारियों और परिजनों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया। यह घटना समाज की उस सोच पर प्रहार करती है, जिसमें आज भी ‘पुत्र प्राप्ति’ और सामाजिक कारणों से लगातार बच्चे पैदा किए जाते हैं।
महिला सशक्तिकरण और जागरूकता का संदेश
कलेक्टर ने समाज को आईना दिखाते हुए कहा कि आज का समय बदल चुका है। उन्होंने उदाहरण दिया कि मध्य प्रदेश में लगभग 31 प्रतिशत कलेक्टर महिलाएं हैं और पूरी टीम महिलाओं की है। फिर भी, क्यों अभी भी भेदभाव की बातें की जाती हैं? उन्होंने केवल महिला कर्मचारियों को ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों और मैदानी स्टाफ की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि परिवार नियोजन के प्रति जागरूकता अभियान केवल कागजी नहीं होना चाहिए, बल्कि जमीनी स्तर पर लोगों को छोटे परिवार के लाभ और मातृ स्वास्थ्य के महत्व के बारे में जागरूक करना जरूरी है। साथ ही, उन्होंने अस्पताल में भोजन की गुणवत्ता की भी जांच की और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के निर्देश दिए।
मीडिया से बातचीत में उन्होंने स्वीकार किया कि मैहर एक नया जिला है, जहां महिला विशेषज्ञ, नेफ्रोलॉजिस्ट और ऑर्थोपेडिक सर्जन जैसे विशेषज्ञों की कमी एक बड़ी चुनौती है, जिसे दूर करने के लिए वे निरंतर प्रयासरत हैं।









