ग्वालियर के पश्चिमी क्षेत्र का विकास तेज करने के लिए बायपास परियोजना का निरीक्षण
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ग्वालियर के पश्चिमी इलाके के विकास को गति देने के उद्देश्य से बनाए जा रहे ‘वेस्टर्न बायपास’ परियोजना का निरीक्षण किया। यह 1374 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 29 किलोमीटर लंबा बायपास ग्वालियर के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। सिंधिया ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इस परियोजना को निर्धारित समय सीमा के भीतर गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाए।
बायपास से ग्वालियर का विस्तार और यातायात में सुधार
पहले ग्वालियर का विस्तार मुख्य रूप से पूर्वी क्षेत्र में ही हो रहा था, लेकिन यह बायपास पश्चिमी क्षेत्र के विकास के नए द्वार खोल देगा। इससे निरावली से पनिहार तक की दूरी अब शहर के अंदर फंसे बिना महज 20 मिनट में तय की जा सकेगी। भारी वाहनों और यात्रियों को अब शिवपुरी और झांसी जाने के लिए शहर के बीच से गुजरने की आवश्यकता नहीं होगी। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को वर्ष 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
प्रोजेक्ट के लाभ और पर्यावरण संरक्षण के उपाय
यह मेगा प्रोजेक्ट विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (SADA) क्षेत्र को लाभ पहुंचाएगा, जो दिल्ली के करीब होने के कारण एक काउंटर मैग्नेट सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहाँ भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) जैसे राष्ट्रीय संस्थानों की स्थापना की योजना है। साथ ही, टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन (TMZ) भी स्थापित किया जाएगा, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। पर्यावरण और सुरक्षा का ध्यान रखते हुए, बायपास के निर्माण में 13 अंडरपास बनाए जाएंगे, जो क्षेत्रीय वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करेंगे, ताकि जानवरों का आवागमन बाधित न हो।











