कूनो नेशनल पार्क में चीता पुनर्स्थापना का सफल प्रयास
मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क अब केवल एक वन्यजीव अभयारण्य नहीं रहा, बल्कि यह विश्व का सबसे प्रभावशाली ‘ग्लोबल चीता ब्रीडिंग सेंटर’ बन चुका है। यहाँ नामीबिया (Namibia) और दक्षिण अफ्रीका (South Africa) से लाए गए चीते अपने अनुकूल वातावरण में पूरी तरह से स्थापित हो गए हैं। कूनो की धरती पर अब हर दिन नन्हे शावकों की किलकारियों की गूंज सुनाई देती है, जो इस परियोजना की सफलता का प्रतीक है।
प्राकृतिक परिस्थितियों ने चीता प्रजनन को बनाया सफल
विशेषज्ञों का मानना है कि यहाँ की भौगोलिक स्थिति और पर्याप्त शिकार की उपलब्धता ने चीता प्रजनन के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया है। मादा चीते लगातार अपने शावकों को जन्म दे रही हैं, जो इस बात का संकेत है कि वे तनावमुक्त हैं और कूनो को अपना घर मान चुकी हैं। इस प्रोजेक्ट की प्रगति का अंदाजा इन आंकड़ों से लगाया जा सकता है कि अब कूनो में कुल चीते और शावकों की संख्या 57 तक पहुंच गई है। इनमें से 27 से अधिक शावकों का जन्म भारत की ही धरती पर हुआ है।
प्रोजेक्ट चीता की ऐतिहासिक उपलब्धियां और भविष्य की योजनाएँ
17 सितंबर 2022 को प्रधानमंत्री मोदी ने नामीबिया से आए आठ चीते कूनो में छोड़कर इस महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत की। इसके बाद मार्च 2023 में नामीबियाई मादा चीता ज्वाला (सियाया) ने चार शावकों को जन्म दिया, जो भारत में 70 वर्षों बाद पहली बार जन्मे चीते थे। 2024 में गामिनी नामक मादा ने एक साथ पाँच शावकों को जन्म देकर नया रिकॉर्ड बनाया। फरवरी 2026 में बोत्सवाना (Botswana) से नौ नए चीते लाए गए, और अप्रैल 2026 में गामिनी, निर्वा और ज्वाला ने अपने शावकों को जन्म देकर इस परियोजना को और मजबूत किया।
आगे की योजना के तहत, कूनो पर बढ़ते दबाव और बेहतर प्रबंधन के लिए गांधी सागर अभयारण्य को भी चीता संरक्षण का दूसरा केंद्र बनाने की दिशा में काम चल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यहाँ की भौगोलिक परिस्थितियाँ विश्व में चीता प्रजनन के लिए सबसे उपयुक्त हैं।
कूनो में बढ़ती चीता आबादी से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ हुआ है। वाइल्डलाइफ टूरिज्म में वृद्धि से श्योपुर और आसपास के जिलों में रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं, जिससे क्षेत्र की आर्थिक स्थिति में सकारात्मक बदलाव आया है।









