राज्यसभा में राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव
आम आदमी पार्टी के सात सांसदों ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का साथ छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया है, जिससे संसद में राजनीतिक समीकरण पूरी तरह से बदल गए हैं। इस घटनाक्रम ने राज्यसभा में बहुमत का समीकरण भी प्रभावित किया है। खासतौर पर पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए यह एक महत्वपूर्ण राजनीतिक मोड़ माना जा रहा है।
सांसदों के विलय की योजना और रणनीति
सांसदों के विलय की प्रक्रिया सोमवार, 27 अप्रैल को पूरी होनी थी, जब गृह मंत्री पश्चिम बंगाल (West Bengal) चुनाव प्रचार से लौटकर सभी सांसदों से मिलने वाले थे। लेकिन तभी बीजेपी को पता चला कि केजरीवाल को इस साजिश का पता चल गया है और वे सांसदों को मनाने में जुट गए हैं। इस कारण इस ‘ऑपरेशन’ की तारीख को टाल दिया गया और शाह की गैरमौजूदगी में ही शुक्रवार को इस मिशन को अंजाम दे दिया गया।
मुख्य रणनीतिकार और नेताओं की भूमिका
इस ऑपरेशन के मुख्य किरदारों में राघव चड्ढा (Raghav Chadha) को रणनीतिकार माना जा रहा है, जो पर्दे के पीछे से इस पूरे अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं। शराब नीति मामले के बाद से ही वे पार्टी से दूरी बनाए हुए थे, लेकिन लंदन में उनकी आंखों की सर्जरी के दौरान ही बीजेपी से बातचीत का रास्ता साफ हो गया। वापस लौटकर उन्होंने धीरे-धीरे दूसरे सांसदों को भरोसे में लिया।
संदीप पाठक (Sandeep Pathak) इस घटना में सबसे बड़ा झटका हैं, जिन्होंने पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) की ऐतिहासिक जीत की नींव रखी थी। केजरीवाल को सबसे ज्यादा दुख पाठक के जाने का हुआ, क्योंकि उन्होंने आखिरी समय तक केजरीवाल को वफादारी का भरोसा दिलाया था, लेकिन अंत में वे सीधे राघव चड्ढा के साथ बीजेपी में शामिल हो गए।
पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह (Harbhajan Singh) का जाना भी चौंकाने वाला नहीं था। सूत्रों के अनुसार, उपराष्ट्रपति चुनाव के दौरान ही बीसीसीआई (BCCI) से आए एक फोन ने उनका रुख स्पष्ट कर दिया था। वे पहले से ही बीजेपी के प्रभाव क्षेत्र में थे।
वहीं, उद्योगपति सांसदों जैसे राजिंदर गुप्ता (Rajninder Gupta), विक्रमजीत साहनी (Vikramjit Sahni) और अशोक मित्तल (Ashok Mittal) का आधार व्यापार था, राजनीति से ज्यादा। अशोक मित्तल के संस्थानों पर विलय से ठीक नौ दिन पहले ईडी (ED) ने छापेमारी की थी। इन सांसदों के लिए केंद्र सरकार के साथ चलना एक व्यावसायिक आवश्यकता भी बन गई थी।











